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जुलाई, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कसरतें जिमअ् के नुक़सानात 35

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 035*             _*💔कसरतें जिमअ् के नुक़सानात💔*_                                 *{पार्ट 3️⃣}* _*💫अल्लामा जलालुद्दीन सुयूती ने लिखा है:*_ _*💞"जिमाअ में कसरत बड़े नुकसान का बाइस है, कुव्वते जिस्मानी के कमजोर होने के साथ दिमाग और बीनाई भी कमज़ोर हो जाती है। बुढ़ापे के आसार वक़्त से पहले नमूदार हो जाते हैं। मनी ग़िज़ा का खुलासा है, जब इन्सान कसरते जिमाअ़् का आदी हो जाता है, पहले तो मनी ख़ारिज होती है, फिर गिज़ा और रतूबाते अस्लिया का खून मनी की शक्ल में आ जाता है और रतूबाते अस्लिया फ़ना होने से हलाक़त मोजिब बनता है"।*_  _*💫साहिबे बुस्तान ने हज़रते अली का कौल नक्ल किया है:*_  _*✨"जो शख्स इस बात का ख्वाहिश मन्द हो कि उसकी सेहता तन्दरूस्ती ज़्यादा दिनों तक कायम रहे तो उसको चाहिये सब को जल्दी खाया करे, कर्ज...

कसरतें जिमअ् के नुक़सानात34

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 034*             _*💔कसरतें जिमअ् के नुक़सानात💔*_                                 *{पार्ट 2️⃣}* _*🏥हकीमों ने लिखा है कि हफ्ते में ज़्यादा से ज़्यादा दो मर्तबा मुबाशरत की जाय। किसी ने हकीम लुकमान से पूछा कि ज़िन्दगी में औरत के पास कितनी बार जाना चाहिये? उन्होंने कहा एक मर्तबा। नौजवान ने कहा कि इतना सब्र मुश्किल है, आपने जवाब दिया फिर साल में एक बार, पूछने वाले ने कहा यह वक़्त भी ज़्यादा है, आपने फरमाया फिर छः माह में एक बार, नौजवान ने जब इसे भी ज़्यादा बताया तो हकीम लुकमान ने नौजवान को मुखातब करते हुए कहा, 'यह मौत का कुआं है,जो चाहो छलांग लगा लो"।*_ _*💫बुकरात से किसी ने पूछा हफ्ते में कितनी बार मुबाशरत करनी चाहिये? उसने जवाब दिया सिर्फ एक बार। पूछने वाले ने फिर पूछा एक मर्तबा क्यों, इससे ज़्यादा क्यों नहीं? बुकरात...

कसरतें जिमअ् के नुक़सानात*{पार्ट 1️⃣ } 33

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 033*             _*💔कसरतें जिमअ् के नुक़सानात💔*_                                 *{पार्ट 1️⃣ }* _*📖मसअलाः- ज़िन्दगी में एक मर्तबा जिमाअ़् करना क़ज़ाअन वाजिब है हद मुकर्रर नहीं , इतना तो हो कि औरत की नज़र औरों की तरफ न उठे और इतनी कसरत भी जायज़ नहीं कि औरत को ज़रर ( नुकसान ) पहुंचे ।*_ _*💞मुबाशरत से जो चीज़ निकलती है वह दरअस्ल रोगने हयात है कि चिरागे उम्र उसी से रौशन और कायम रहता है । उसके अन्दर यह सलाहिय्यत होती है कि जुज़्वे बदन बन जाय , उसके निकलने से जिस कद्र कमज़ोरी महसूस होती है , किसी गलीज़ जिस्मानी चीज़ के निकलने से नहीं होती । जो लोग औरत को सिर्फ अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशात की तक्मील का ज़रिया समझते और महज़ शहवत परस्ती की वजह से कसरते जिमाअ़् के आदी बन जाते हैं , वे अपनी सेहतो ज़िन्दगी के सख्त दुश्मन हैं । उ...

उन रातों का बयान जिनमे मुबाशिरत ( संगत ) करना मना है*_ 32

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 032*                                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*  _*🌕उन रातों का बयान जिनमे मुबाशिरत ( संगत ) करना मना है*_ _*✨हर महीने की पहली रात और चाँद की पन्द्रहवीं रात और महीने की आखिरी रात में जिमाअ़् न किया जाए कि इन रातों में शैतान जिमाअ़् के वक़्त हाज़िर होते हैं और कुछ यह कहते हैं कि इन रातों में शैतान जिमाअ़् करते हैं ।*_  _*⏳हफ़्ता और इतवार , मंगल और बुध की दरमियानी शब में हमबिस्तरी करने से बचना चाहिये कि इन रातों में हमबिस्तरी करने से अगर हम्ल ठहर जाए तो बच्चा बेहया , बदनसीब और मुफ़्लिसो हरीस पैदा होने के इमकानात हैं ।*_ _*💫इमाम ग़ज़ालो फरमाते हैं : रात के पहले हिस्से में सोहबत करना मकरूह है कि सोहबत के बाद पूरी रात नापाकी की हालत में सोना पड़ेगा ।*_ _*📚सल...

तबीबों ( हकीमों ) की तहकीक के मुताबिक*_ 31

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 031*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*  _*✨तबीबों ( हकीमों ) की तहकीक के मुताबिक*_ _*👉🏻 ( 1 ) पेट भरा होने की हालत में मुबाशरत नहीं करना चाहिये कि इससे औलाद कुन्द ज़ेहन पैदा होगी ।*_  _*👉🏻 ( 2 ) ज़्यादा बूढ़ी औरत से भी जिमाअ़् नहीं करना चाहिये कि इससे बदन कमज़ोर और आदमी जल्द बूढ़ा हो जाता है ।*_  _*👉🏻 ( 3 ) खड़े होकर जिमाअ़् करने से बदन कमज़ोरो ज़ईफ़ हो जाता है ।*_  _*👉🏻 ( 4 ) थोड़ी - थोड़ी देर बाद जिमाअ़् करना सेहत के लिये नुकसान दह है । बल्कि दो मर्तबा की हमबिस्तरी में इतना वक्फा ( ठहरना ) होना चाहिये कि जिससे बदन हल्का मालूम हो और तबीअत में अच्छी तरह ख्वाहिश पैदा हो ।*_  _*👉🏻 ( 5 ) पेट भरा होने की हालत में अगर मुबाशरत की जाय तो सुरअ़ते इन्जाल का मर्ज़ लाहिक हो जाता है , मेअदा कमज़ो...

मुबाशिरत के औक़ात 30

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 030*                                   *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                  *⌚मुबाशिरत के औक़ात⌚* _*╭┈► शरीअत ने जिमाअ़् के लिये कोई ख़ास वक़्त मुकर्रर नहीं किया है । हाँ , बअज़ शरई अवारिज़ की मौजूदगी में जिमाअ करना मना है । जैसे , रोज़ा , नमाज़ , एहराम , एतिकाफ़ , हैजो निफ़ास के वक़्त , इनके अलावा दिनो रात के हर हिस्से में सोहबत करना जाइज़ है लेकिन बुजुरगाने दीन या हकीमों ने कुछ ऐसे औकात बताए हैं जिनमें सोहबत करना सेहत के लिये फायदेमन्द होने के साथ सवाब का काम भी है ।*_ _*╭┈►जुमा या शबे जुमा को मुबाशरत मुस्तहब है । शब में ज़्यादा फज़ीलत है । हदीस शरीफ़ में है कि जुमे की शब में जिमाअ करने वाले को दो सवाब मिलते हैं । एक अपने गुस्ल और दूसरे...

जिमाअ के बाद का अमल 20

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 029*                                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                 *✨जिमाअ के बाद का अमल✨* _*╭┈► जिमाअ (संगत) से फारिग होकर मर्दो औरत दोनों अलग-अलग हो जाए, फिर किसी साफ़ कपड़े से दोनों अपने-अपने मकामे मख्नसूस को साफ़ कर लें। दोनों का कपड़ा अलहदा-अलहदा होना चाहिये। एक ही कपड़े से साफ़ न करें कि यह नफ़रतो जुदाई का सबब है। फिर औरत को सीधी करवट पर लेटे रहने का हुक्म दें, ताकि अगर नुत्फ़ा करार पा जाए तो लड़का पैदा हो, अगर उल्टी कर्वट पर लेटेगा तो लड़की पैदा हो सकती है और फरागत के बाद दिल ही दिल में इस आयत की तिलावत करे:*_ اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْ خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا  فَجَعَلَهٗ نَسَبًاوَّ صِهْرً اوَّکَانَ رَبُّکَ قَدِ...

तरीका-ए-जिमाअ 28

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 028*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                        *✨तरीका-ए-जिमाअ✨*                                 *{पार्ट 4️⃣ }* _*💫फ़रागत के बाद मर्दो औरत दोनों अलग-अलग कपड़े से अपनी अपनी शर्मगाह को साफ़ कर लें। दोनों का एक ही कपड़े से साफ करना नफ़रतो जुदाई का सबब है। अगर किसी शख्स को एहतिलाम हुआ हो तो बगैर वुजू किये (यानी हाथ, मुंह, शर्मगाह धोए) जिमाअ़् न करे वर्ना होने वाले बच्चे पर बीमारी का अंदेशा है। हो सकता है कि बच्चा दीवाना और बेकार पैदा हो।*_ _*✨ज़्यादा बूढ़ी औरत से जिमाअ़् नहीं करना चाहिए कि इससे बदन कमज़ोर और आदमी जल्द बूढ़ा हो जाता है। खड़े होकर भी जिमाअ़् नहीं करना चाह...

*✨तरीका-ए-जिमाअ✨*27

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 027*                                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                        *✨तरीका-ए-जिमाअ✨*                                 *{पार्ट 3⃣ }* _*✨औरत के बैठी हुई हालत में मुक़ारबत ( संगत ) न करे , इसी तरह पहलू की तरफ़ से भी न करे कि इससे दर्दे कमर पैदा होता है । औरत को अपने ऊपर भी न चढ़ाये कि इससे औरत बाँझ हो जाती है बल्कि औरत को चित लिटाए और उसकी टाँगो को ऊपर उठाए ।*_ _*💫शैख़ बू अली सीना के नज़दीक जिमाअ की तमाम शक्लों में बुरी शक्ल यह है कि औरत मर्द के ऊपर हो और मर्द नीचे चित लेटा हो क्योंकि इस सूरत में मनी मर्द के उज़्व में बाकी रह कर ...

इमामे अहले सुन्नत, सरकारे आला हज़रत इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी अलैहिर्रह़मा फरमाते हैं 26

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 026*                         *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                        *✨तरीका-ए-जिमाअ✨*                                 *{पार्ट 2️⃣ }* _*✨इमामे अहले सुन्नत, सरकारे आला हज़रत इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी अलैहिर्रह़मा फरमाते हैं:*_ _*"जिमाअ़् के वक़्त यह नियत हो*_ _*💫(1) तलबे वलदे स्वालेह ।*_ _*💫(2) बीवी का अदाए हक़ ।*_ _*💫(3) यादे इलाही और आमाले स्वालेहा के लिये अपने दिल को फारिग करना। न बिल्कुल बरहना हो न खुद, न औरत, बकिब्ला रू न पुश्त किब्ला, औरत चित हो और यह उकडूं बैठे। बोसो किनार, छेड़-छाड़ से शुरू करे। जब औरत को भी मुतवज्जह पाए । ये पढे कर:*_ بِسْمِ اللّٰه...

तुम्हारी औरतें तुम्हारे लिये खैतियां हैं तो आओ अपनी खेतों में जिस तरह चाहो। 25

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 025*                                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                        *✨तरीका-ए-जिमाअ✨*                                 *{पार्ट 1️⃣ }* _*कुर्आन में - अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है;*_ _*"तुम्हारी औरतें तुम्हारे लिये खैतियां हैं तो आओ अपनी खेतों में जिस तरह चाहो।"*_ _*✨जिमाअ़् के तरीके बहुत से हैं बल्कि हवस परस्तों ने कुछ बेहूदा और तकलीफ़ दह तरीके भी ईजाद कर लिये हैं। उन तरीकों से बचना चाहिये बल्कि ऐसा तरीका अपनाना चाहिये जिससे दोनों खुशो खुर्रम और हश्शाश बश्शास हो जाऐं। बेहतर तरीका यह है कि औरत चित लेट जाए और मर्द उसके ऊपर आए। फिर उसके स...

अब हम जिमाअ के कुछ आदाब बयान करते हैं: 24

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 024*                                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला* _*🌹अब हम जिमाअ के कुछ आदाब बयान करते हैं:*_ _*💫(1) जिमाअ़् से पहले औरत से मुलाकात और छेड़-छाड़ करे ताकि औरत का दिल खुश हो जाय और उसकी मुराद आसानी से हासिल हो। खूब बोसो किनार जारी रखें यहाँ तक कि औरत जल्दी-जल्दी साँस लेने लगे और उसकी घबराहट बढ़ जाय और मर्द को अपनी तरफ ज़ोर से खींचे।*_ _*💫(2) मर्द को चाहिये कि अपनी औरत पर जानवरों की तरह न गिरे। सोहबत से पहले कासिद होता है। लोगों ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह! वह कासिद क्या है? आपने फरमाया "बोसो किनार।*_ _*💫(3) जिमाअ़्.करते वक़्त कलाम करना मकरूह है बल्कि बच्चे के गूंगे या तोतले होने का खतरा है। यूं ही उस वक़्त औरत की शर्मगाह पर नज़र न करे कि बच्चे के अन्धे होने का अन्देश...

जिमाअ़् के आदाब 23

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 023*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                    _*🌹जिमाअ़् के आदाब🌹*_ _*✨जिमाअ करना इन्सान की वह तबई और अहम ज़रूरत है जिसक बगैर इन्सान का सही तौर से ज़िन्दगी गुज़ारना मुश्किल बल्कि तकरीबन ना मुम्किन सा है। अल्लाह तआला ने जिमाअ़् की ख़्वाहिर इन्सानों ही में नहीं बल्कि तमाम हैवानात में वदीअ़त रखी है लेकिन शरीअत ने इन्सान की इस फ़ितरी ख्वाहिश की तक्मील के लिये कुछ आदाब और तरीके मुकर्रर कर दिये ताकि इन्सान और हैवान में फर्क हो जाए। अगर जिमाअ़् का मकसद सिर्फ शहवत की तकमील होता ख्वाह जिस तरह भी हो तो इन्सान और हैवान में फर्क ही न होता। इसलिये इसके आदाब की रिआयत शीरअी हक होने के साथ-साथ इन्सानी हक़ भी है। कुरान- अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:*_ _*"तो अब उनसे सोहबत क...

जिमाअ़् के फायदे 22

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 022*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                    _*✨जिमाअ़् के फायदे✨*_                                 *{पार्ट 2️⃣ }* _*जिमाअ़् के मुतअल्लिक याद रखना चाहिये कि जब तक शहवत ग़ालिब न हो और मनी मुस्तअिद न हो, जिमाअ़् करना मुनासिब नहीं लेकिन जब वह हालत पाई जाए तो फ़ौरन मनी खारिज करनी चाहिये। जिस तरह रद्दी फुला पेशाब पाखाना से खारिज किया जाता है क्योंकि उस वक़्त मनी के रोकने मे बड़े नुक्सान का अन्देशा है।*_ _*📚(मुजर्राबात सुयूती पेज 40)*_ _*✨उम्दा जिमाअ वह कहलाता है जिसका नतीजा दिल की ताज़गी और तबीअत को फ़रहतो सुरूर हो। बुरा जिमाअ़् वह है जिसका नतीजा लर्ज़ा व तंगीए नफ़्सो दिल की कमजोरी ...

जिमाअ़् का बयान21

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 021*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                    _*🌹जिमाअ़् का बयान🌹*_                                 *{पार्ट 1️⃣ }* _*✨जिमाअ़् (हमबिस्तरी) की ख्वाहिश एक फ़ितरी (Natural) जज़्बा है जो हर ज़ीरूह में खिलक़तन पाया जाता है। इसे बताने की ज़रूरत नहीं होती। हर एक अपनी नौअ़ की मादा की तरफ तबई एतबार से माइल होता है और यह जज़्बा ही इज़्दिवाजी ज़िन्दगी और जिन्सी तअल्लुकात की जान है। जब इश्क व मोहब्बत का जज़्बा हैवानात में पाया जाता है और वे भी अपनी मिलने की ख्वाहिश पुरी करते हैं । नर को मादा की तलाश रहती है और मादा को नर की तो फिर इन्सान जो जज़्बात का मअदिन है उसका दिल जिमाअ़् और ख्वाहिशे व...

बेहतरीन शौहर कौन है 20

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 020*                   *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*            _*🌹बेहतरीन शौहर कौन है?🌹*_ _*🌟(1) जो अपनी बीवी के साथ नर्मी, खुश सिल्की और हुस्ने सुलूक के साथ पैश आये।*_ _*🌟(2) जो अपनी बीवी के हुकूक अदा करने में किसी किस्म की ग़फ़लत और कोताही न करे।*_ _*🌟(3) जो अपनी बीवी की खूबियों पर नज़र रखे और मामूली ग़लतियों को नज़र अंदाज़ करे।*_ _*🌟(4) जो अपनी बीवी को पर्दे में रख कर इज़्ज़त व आबरू की हिफाज़त करे।*_ _*🌟(5) जो अपनी बीवी को दीनदारी की ताकीद करता रहे और शरीअत की राह पर चलाये।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 36*_                   _*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://chat.whatsapp.com/BlTnmJ...

शौहर अपनी औरत को इन उमूर पर मारपीट सकता है* 19

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 019*                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*  _*💫शौहर अपनी औरत को इन उमूर पर मारपीट सकता है*_ _*🔖(1) बनाव सिंगार पर कुदरत रखने के बावजूद बनाव सिंगार न करे घर में मैली कुचैली, परा गन्दा हाल रहे ।*_ _*🔖(2) नमाज़ न पढ़े ।*_ _*🔖(3) गुस्ले जनाबत न करे ।*_ _*🔖(4) बगैर इजाज़त घर से चली जाय ।*_ _*🔖(5) शौहर अपने पास बुलाये और वह न आये जबकि हैज़ो निफ़ास से पाक थी और फर्ज़ रोज़ा भी रखे हुए न थी ।*_ _*🔖(6) गैर महरम के सामने चेहरा खोल कर चले फिरे।*_ _*🔖(7) अजनबी मर्द से कलाम करें ।*_ _*🔖(8) शौहर से झगड़ा करे ।*_ _📚(बहारे शरीअत हिस्सा 9, पेज 119)_ _*✨शौहर को चाहिये कि औरत के खर्चों के बारे में बहुत ज़्यादा बख़ील और कन्जूसी न करे और हद से ज़्यादा फुजूल खर्ची भी न करे। हदीस शरीफ में है कि बीवी को नफ़क़ा देना खैरात देने...

औरतों के शरई हुकूक मर्द पर चार किस्म के हैं 18

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 018*  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                     _*🌹बीवी के हुकूक 🌹*_ *✨औरतों के शरई हुकूक मर्द पर चार किस्म के हैं✨* *(1) खाना जैसा खुद खाये उसे भी खिलाये।* *(2) लिबास देना यानी जिस मैयार के कपड़े खुद पहने उसे भी पहनाये।* *(3) मकान कि हस्बे हैसियत उसके रहने के लिए दे।* *(4) हमबिस्तरी करना यानी निकाह के बाद एक बार जिमाअ् करना औरत का हक़ है ।* *अगर एक बार भी न कर सके तो औरत के दावे पर काज़ी मर्द को साल भर की मोहलत देगा । अगर इसमें भी हमबिस्तरी न हो तो काज़ी तफरीक कर देगा। इसके बाद गाह बगाह वती (सम्भोग) करना दयानतन वाजिब है कि उसे परेशान नज़री न पैदा हो और उसकी रज़ा के बगैर चार माह तक तर्के जिमाअ् बिला उज्र सहीह शरीअ़ी नाजाईज़ ।* *"अगर मर्द जिमा पर कादिर है, फिर भी जिमा नहीं करता ख्वाह इब्तिदाअन ख्वाह तर्के मुतलक क...

बीवी के हुकूक 17

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 017*                                    _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                     _*🌹बीवी के हुकूक 🌹*_ _*📚हदीस - हज़रत अबू हुरैरह रदियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया "ईमान में कामिल तरीन वह शख्स है जो सब से ज़्यादा बा अखलाक हो और तुम में सब से ज़्यादा बेहतर वह है जो अपनी औरतों के लिए बेहतर हो।"*_ _📚(तिरमिज़ी शरीफ जिल्द 1, पेज 138)_ _*📚हदीस - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः"औरत टेढ़ी पसली से पैदा की गयी है। अगर कोई शख्स टेढ़ी पसली को सीधी करने की कोशिश करेगा तो पसली की हड्डी टूट जायेगी मगर वह कभी सीधी न होगी और अगर छोड़ देगा तो टेढ़ी बाकी रहेगी। ठीक इसी तरह अगर कोई शख...

बीवी के हुकूक 16

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 016*                  _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                     _*🌹बीवी के हुकूक 🌹*_ _*✨इस्लाम से पहले औरतों का बहुत बुरा हाल था, दुनिया में औरतों की कोई इज़्ज़तो वक़अ़त ही नहीं थी। मर्दों की नज़रों में उनकी कोई हैसियत न थी । वे मर्दों की नफ़्स की ख्वाहिश पूरी करने का एक खिलौना थीं, दिन-रात मर्दों की किस्म-किस्म की खिदमतें करती थी । मगर जालिम मर्द फिर भी उन औरतों की कोई कदर नहीं करता था बल्कि जानवरों की तरह उनके साथ सुलूक किया करता था। उनका कोई मकाम न था। शौहर फ़क़्त अपनी खिदमत के लिए उन्हें खाना कपड़ा देकर उनसे गुलामों जैसा बर्ताव करता था बल्कि उन्हें जायदाद की तरह इस्तेमाल करता था लेकिन इस्लाम ने औरत को नीचे से ऊपर उठाया और उनके लिए हुकूक मुकर्रर किये गये। माँ-बाप, भ...

बेहतरीन बीवी वह है 15

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 015*                  _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                 _*🌹बेहतरीन बीवी वह है 🌹*_ _*🥀(1) जो अपने शौहर की फरमा बरदारी और ख़िदमत गुज़ारी को अपना फर्जे मनसबी समझे।*_ _*🥀(2) जो अपने शौहर के तमाम हुकूक अदा करने में कोताही न करे ।*_ _*🥀(3) जो अपने शौहर की खूबियों पर नज़र रखे और उसके ड्यूब और खामियों को नज़र अन्दाज़ करती रहे ।*_ _*🥀(4) जो अपने शोहर के सिवा किसी अजनबी मर्द पर निगाह न डालें न किसी की निगाह अपने ऊपर पड़ने दे ।*_ _*🥀(5) जो अपने शौहर की ज्यादती और जुल्म पर हमेशा सब्र करती रहे ।*_   _*🥀(6) जो मज़हब की पाबंदी और दीनदार हो और अल्लाह व बन्दें के हुकूक़ को अदा करती हो ।*_ _*🥀(7) जो पर्दे में रहे और अपने शौहर की इज्जत नामूस की हिफ़ाज़त करें ।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन...

शौहर के हुकूक 14

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 014*                        _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                    _*💗शौहर के हुकूक 💗*_ _*📚हदीसः - हज़रत इब्ने उमर रदियल्लाहु अन्हुमा से मरवी के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " शौहर का हक़ औरत पर यह है कि अपने नफ़्स को उससे रोके और सिवाय फ़र्ज़ के किसी दिन उसकी इजाज़त के बगैर रोज़ा न रखे । अगर ऐसा किया यानी बगैर इजाज़त रोज़ा रख लिया तो गुनाहगार होगी और उसकी इजाज़त के बगैर औरत का कोई अमल मक़बूल नहीं । अगर औरत ने कर लिया तो शौहर को सवाब है और औरत पर गुनाह । जो औरत अपने घर से बाहर जाय और उसके शौहर को नागवार हो , जब तक पलट कर आये आसमान में हर फ़रिश्ता उस पर लानत करे और इन्सानो जिन के सिवा जिस - जिस चीज़ पर गुज़रे सब उस पर लानत करें ।*_ _*...

शौहर के हुकूक 13

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 013*                  _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                  _*💗शौहर के हुकूक 💗*_ _*📓कुर्आन में : - अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है : " मर्द अफ़सर हैं औरतों पर ।*_ _( सूरह अलनिसा )_  _*📚हदीस : - हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने औफा रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने फरमाया : " अगर मैं किसी को हुक्म करता कि गैर खुदा के लिए सजदा करे तो हुक्म देता कि औरत अपने शौहर को सजदा करे । कसम है उसकी जिसके कब्ज - ए - कुदरत में मुहम्मद ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) की जान है , औरत अपने परवरदिगार का हक़ अदा न करेगी , जबतक शौहर के कुल हक अदा न करे ।*_  _*📚( इब्ने माजा पेज 133 )*_ _*📚हदीस : - हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः " औरत पर सब आदमियों...

रूखसती का बयान 12

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 012*                                    _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_                  _*💗रूखसती का बयान 💗*_ _*✨जब कोई शख्स अपनी लड़की की शादी करे तो रूखसती वक़्त अपनी लड़की को अपने पास बुलाये । इसके बाद एक प्याले थोड़ा सा पानी लेकर यह दुआ पढ़कर प्याले में दम करे :*_  _*٠اَللّٰہُمَّ اِنّ‌ِیْ اُعِیْذُ ھَابِکَ وَذُرّ‌ِ یَّتَهَا مِنَ الشَّیْطٰنِ الرَّجِیْمِ٠*_ _*अल्लाहुम्मा इन्नी अउईजु हाबिक व जुर्रियतहा मिनश्शेतानिर्रजीम "*_ _*📚तर्जमा : - ऐ अल्लाह ! में इस लड़की को और इसकी होने वाली औलाद को तेरी पनाह में देता हूँ शैतान मरदूद से । फिर उस पानी को दुल्हन के सर और सीने और पीठ पर छींटे मारे , इसके बाद दूल्हा को भी बुलाए और प्याले में दूसर...

दूल्हा , दुल्हन को सजाना 11

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 011*                                    _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_             _*✨दूल्हा , दुल्हन को सजाना ✨*_ _*💗शादी ब्याह के मौके पर दूल्हा को आरास्ता करना और उसके सर पर सेहरा सजाना मुबाह है । इसमें कोई हरज नहीं । रहा दुल्हन को सजाना , उसको जेवरात से आरास्ता करना और हाथ पांव में मेंहदी लगाना मुस्तहब और कारे सवाब है कि यह औरत के लिए ज़ीनत है ।*_ _*📚हदीस : - सरकारे दो जहाँ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः " औरतों को चाहिए कि हाथ पांव पर मेंहदी लगायें ताकि मर्दो के हाथ से मुशाबह न हों ।*_ _*💫एक हदीस पाक में इरशाद हुआः " ज़्यादा न हो तो नाखुन ही रंगीन रखे । मर्द के लिए हाथ पांव में बल्कि नाखुन ही में मेंहदी लगाना हराम है ।*_ _*📚( फतावा रजविया जिल...

किन औरतों से निकाह करना मना ह ै10

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 010*                       _*✨किन औरतों से निकाह करना मना है ?✨*_ _*📍नोटः - बच्चे के दूध पीने का ज़माना दो साल तक है जो ख़्वाह अपनी माँ का पिये या दाई का । दो साल के बाद दूध का पिलाना हराम है लेकिन निकाह हराम होने के लिए ढाई साल का ज़माना है यानी अगर कोई अजनबिया औरत किसी पराये बच्चे को ढाई साल के अन्दर दूध पिलायेगी तो हुरमते रज़ाअत साबित हो जायेगी और अगर इसके बाद पिलायेगी तो हुरमते निकाह साबित नहीं होगी , अगरचे पिलाना हराम है ।*_ *📚 बहारे शरीअत हिस्सा 7 , पेज 29* _*📖मसअलाः - ज़ौजा - ए - मौतू की लड़कियाँ , जीजा की माँ , दादीयां , नानियां , बाप , दादा वगैरह उसूल की बेटियां , बेटे , पोते वगैरहहुमा फुरूअ की बीबियां , इनसे निकाह हराम है ।*_ *📚 आम्म - ए - कुतुब* _*📖मसअलाः - जिस औरत से ज़िना किया उसकी माँ और लड़कियां उस पर हराम हैं । यूंही वह ज़ानिया औरत उस शख्स के बाप दा...

किन औरतों से निकाह करना मना है ? 09

0🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 009*                       _*✨किन औरतों से निकाह करना मना है ?✨*_ _*📓कुर्आन में : - अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है : " हराम हुई तुम पर तुम्हारी माऐं और बेटियां और बहनें और फूफियां और ख़ालाऐं और भतीजियां और भांजियां और तुम्हारी माऐं जिन्होनें दूध पिलाया और दूध की बहनें और औरतों की माऐं ।*_ *📚 सूरह अल - निसा* _*✨इस आयते करीमा से मालूम हुआ कि माँ , बेटी , बहन , फूफी , खाला , भतीजी , भांजी , रज़ाई माँ , रज़ाई बहन , सास वगैरह से निकाह हराम है ।*_ _*📖मसअलाः - माँ सगी हो या सौतेली , बहन सगी हो या सौतेली बेटी , पोती , नवासी , नानी , दादी ख़्वाह कितनी पुश्तों का फ़ासिला हो इन सब से निकाह हराम है ।*_ _*📖मसअला : - फूफी , फूफी की फूफी , खाला , ख़ाला की ख़ाला, भतीजी , भान्जी और भान्जी की लड़की या उसकी पोती , नवासी भी मुहरमात में दाखिल हैं । इन सब से भी निकाह हराम है ।*_ _*📖मसअलाः...

शादी से पहले लड़की को देखना 08

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 008*            _*💞शादी से पहले लड़की को देखना 💞*_ _*📖मसअलाः - जिस औरत से निकाह करने का इरादा हो तो पैगाम डालने से कब्ल उसको देख लेना मुस्तहब है क्योंकि देखने के बाद अगर दिल को भा गई तो निकाह के बाद मुहब्बत ज़्यादा होगी ।*_ _*✨हज़रत इमाम गज़ाली अलैहिर्रहमा फरमाते हैं : " औरत का जमाल मुहब्बतो उलफत का ज़रिया है । इसलिये निकाह करने से पहले औरत को देख लेना सुन्नत है । बुजुर्गों का कौल है कि औरत को देखे बगैर जो निकाह होता है उसका अन्जाम परेशानी और गम है ।*_ *📚 कीमिया ए सआदत पेज 260* _*✨साहिबे गुनिय्या फरमाते है : " मुनासिब है कि निकाह से पहले औरत का चेहरा और ज़ाहिरी बदन यानी हाथ मुँह वगैरह देख ले ताकि बाद में नफरत या तलाक की नौबत न आये ।*_ *📚गुनिय्यतुत्तालिबीन 112* _*📖मसअला : - मर्द का अजनबीया औरत की तरफ़ बिला ज़रूरत नज़र करना जाइज़ नहीं लेकिन उस औरत से निकाह करने का इरादा है तो इस नियत से देख...

निकाह का पैगाम 07

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 007*                 _*💞निकाह का पैगाम 💞*_ _*✨जब किसी लड़की या औरत से शादी करने का इरादा हो तो उसे शादी का पैगाम देने से पहले मालूम कर लेना बेहतर है कि उसके लिये किसी और शख्स ने पहले से पैगाम तो नहीं दिया है या किसी से रिश्ते की बात चीत तो नहीं चल रही है । अगर ऐसा है तो उस लड़की के लिए निकाह का पैगाम हरगिज़ न दे । ऐसी हालत में निकाह का पैगाम देना सख्त मना है ।*_ _*📚हदीसः - हज़रत अबु हुरैरा व हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रदियल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " कोई शख्स अपने इस्लामी भाई के पैगाम पर अपने निकाह का पैगाम न दे । यहाँ तक कि पहला खुद इरादा तर्क कर दे या उसे पैगाम भेजने की इजाज़त दे दे ।*_ *📚 बुखारी शरीफ़ जिल्द 2 , पेज 772*         _*💞शादी से पहले लड़की को देखना 💞*_ _📚हदीसः - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि ...

किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ? 06

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 006*                  _*✨किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ?✨*_ _*हदीस : - हज़रत अबु हुरैरह रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " चार वज्हों से औरतों से निकाह किया जाता है :*_ _*💫( 1 ) मालदारी ‌।*_ _*💫( 2 ) शराफ़ते खानदान ‌‌।*_ _*💫( 3 ) खूबसूरती ‌।*_ _*💫( 4 ) दीनदारी | लेकिन तुम दीनदार औरत को इख्तियार करो यानी आमतौर पर लोग औरत के मालो जमाल और ख़ानदान पर नज़र रखते हैं । इन ही चीज़ों को देखकर शादी करते हैं मगर तुम दीनदारी औरत की तमाम चीज़ो से पहले देखो ।*_ _*✨इस हदीस से मालूम हुआ कि दीनदार औरत से शादी करना बेहतर है । दीनदार औरत शौहर की फ़रमांबरदार और खिदमतगार होती है । थोड़ी रोज़ी पर कनाअत कर लेती है । शौहर की ऐब जोई नहीं करती है । इसके बरखिलाफ दीन से दूर औरतें नाशुक्रगुज़ार , नाफरमान और शौहर की दूसरों के सामने बुराई बयान करने वाली ...

किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ? 05

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 005*                                  _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_  _*✨किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ?✨*_ _*✨इमाम गज़ाली फ़रमाते हैं कि निकाह करने में औरतो में मुन्दरिजा जेल ( निम्नलिखित ) सिफ़ात देखनी चाहिए :*_ _*💫( 1 ) औरत पारसा और दीनदार हो ।*_ _*💫( 2 ) उसकी आदत और मिज़ाज अच्छे हों , खुश खुल्क और हंस मुख हो क्योंकि बद मिज़ाज औरत नाशुक्री और ज़बान दराज़ होती है और बात - बात पर झगड़ा करती और बुरा भला कहना शुरू कर देती है ।*_ _*💫( 3 ) औरत खूबसूरत और हसीन हो क्योंकि जितनी हसीन होगी , मर्द को उतनी ही उसके साथ मुहब्बतो उलफ़त होगी ।*_ _*💫( 4 ) मेहर कम हो क्योंकि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया " औरतों में वह औरत बहुत अच्छी है जिसका मेहर कम हो ।*_ _*💫( 5 ) औरत ...

किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ? 04

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 004*                  _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_ _*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_   _*✨किन औरतों से निकाह करना बेहतर है ?✨*_ _*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " मुहब्बत करने वाली , ज़्यादा बच्चे पैदा करने वाली औरतों से शादी करो क्योंकि मैं तुम्हारी वजह से उम्मतों पर फ़खर करूंगा ।*_ _*📚( मिश्कात शरीफ़ जिल्द 2 , पेज 267 )*_ _*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " और न उनसे निकाह करो उनके माल की वजह से कि अनकरीब उनके माल उनको सरकश बना देंगे लेकिन उनसे दीनदारी की वजह से निकाह करो और ज़रूर काली कलूटी , नाक कटी अफ़ज़ल होती है दूसरी खूबसूरत गैर दीनदार औरतों से ।*_ _*📚( इब्ने माजा पेज 133 )*_ _*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " औरतों से महज़ उनके हुस्न की वजह से शादी न करो इसलिए कि जल्...