मुबाशिरत के औक़ात 30

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 030*
                 
                *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

                 *⌚मुबाशिरत के औक़ात⌚*

_*╭┈► शरीअत ने जिमाअ़् के लिये कोई ख़ास वक़्त मुकर्रर नहीं किया है । हाँ , बअज़ शरई अवारिज़ की मौजूदगी में जिमाअ करना मना है । जैसे , रोज़ा , नमाज़ , एहराम , एतिकाफ़ , हैजो निफ़ास के वक़्त , इनके अलावा दिनो रात के हर हिस्से में सोहबत करना जाइज़ है लेकिन बुजुरगाने दीन या हकीमों ने कुछ ऐसे औकात बताए हैं जिनमें सोहबत करना सेहत के लिये फायदेमन्द होने के साथ सवाब का काम भी है ।*_

_*╭┈►जुमा या शबे जुमा को मुबाशरत मुस्तहब है । शब में ज़्यादा फज़ीलत है । हदीस शरीफ़ में है कि जुमे की शब में जिमाअ करने वाले को दो सवाब मिलते हैं । एक अपने गुस्ल और दूसरे अपनी औरत के गुस्ल का ।*_

_*╭┈► जिमाअ के लिये सबसे बेहतर वक़्त रात का आख़िरी हिस्सा है , क्योंकि रात के पहले हिस्से में मेअदा गिज़ा से पुर होता है और भरे पेट में मुबाशरत करना सेहत के लिये नुकसानदह है । जबकि रात के आख़िरी हिस्से में सोहबत करना सेहत के लिये फ़ायदेमन्द है । वजह यह है कि रात के आखिरी हिस्से तक खाना अच्छी तरह हज़्म हो जाता है और दिन भर की थकावट नींद से दूर भी हो जाती है । दोपहर को कैलूला के बाद या शब को इशा की नमाज के बाद कुछ देर सोकर हमबिस्तरी करना बेहतर है ।*_

_*👉🏻 उन वक़्तों का बयान जिनमें मुबाशिरत करना मना है*_

_*╭┈►अगर किसी शख्स को एहतिलाम हुआ हो तो बगैर हाथ मुंह और शर्मगाह धोए जिमाअ़् न करे , वरना होने वाले बच्चे पर बीमारी का अन्देशा है । हो सकता है कि बच्चा दीवाना और बेकार पैदा हो ।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 47/48*_          

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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