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खाने के वक़्त के आदाब 89

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 089* _*✨(1) गर्म खाना न खाए और न खाने पर फूंके, न खाने को सूंघे।*_  _*✨(2) खाने के वक़्त अच्छी बातें करे, बिल्कुल चुप रहना मजूसियों का तरीका है।*_  _*✨(3) खाने के वक़्त जो निवाला गिर जाए उसे उठा ले और साफ़ करके खा ले।*_  _*✨(4) हदीस शरीफ में है कि अगर छोड़ देगा तो शैतान के लिए छोड़ेगा।*_  _*✨(5) किसी खाने में ऐब न निकाले। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हरगिज़ खाने में ऐब नहीं निकालते। अगर अच्छा होता तो तनावुल फ़रमा लेते, वरना हाथ रोक लेते।*_  _*✨(6) अपने सामने से खाये, दूसरों के निवाले की तरफ़ न देखे।*_ _*✨(7) दस्तरख्वान पर हरी चीज़ हो तो बेहतर है यानी पर सब्जी वगैरह। हदीस शरीफ में है कि दस्तरख्वान पर जब हरी चीज़ होती है तो फ़रिश्ते हाज़िर होते हैं।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 87/88*_            _*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA ...

खाने के वक़्त के आदाब 88

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 088*                                 _*✨खाने के वक़्त के आदाब ✨*_ _*'बिस्मिल्लाह' पढ़कर शुरू करना और खाने के बाद 'अलहम्दु लिल्लाह' पढ़ना। बेहतर यह है कि पहले निवाले में कहे 'बिस्मिल्लाह' दूसरे में 'बिस्मिल्लाहिर्रहमान' तीसरे " में मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम'। 'बिस्मिल्लाह' ज़ोर से कहे कि साथ वालों को अगर याद न हो तो उससे सुनकर उन्हें याद आजाए। दाहिने हाथ से खाए, नमक से इब्तिदा करे और नमक ही पर खत्म करे यानी पहले नमकीन खाना खाये और फिर बाद में भी नमकीन चीज़ खाये। इससे सत्तर (70) बीमारियां दफ़ा हो जाती हैं। तकिया लगाकर न खाए कि यह अदब के खिलाफ है।*_ _*हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि मैं तकिया लगाकर खाना नहीं खाता कि मैं बन्दा हूँ और बन्दों की तरह बैठता और बन्दों के तरीकों से खाता हूँ। नंगे सर न खाएं कि यह अहले हुनूद का तरीका है और ख़...

जब तक भूक न हो खाने की तरफ़ हाथ न बढ़ाये87

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 087* _*✨(4) जब तक भूक न हो खाने की तरफ़ हाथ न बढ़ाये, खाने से पहले जो चीजें सुन्नत हैं उनमें से बेहतरीन सुन्नत भूक है। इसलिए कि भूक से पहले खाना मकरूह भी है और मज़मूम(बुरा) भी जो शख्स खाना शुरू करते वक़्त भी भूका हो और खाने से हाथ खींचते वक़्त भी भूका रहता हो वह हरगिज़ तबीब(डॉक्टर) का मोहताज न होगा।*_  _*✨(5) जो कुछ हाज़िर हो उस पर क़नाअत करे, उम्दा खाना न ढूंडे।*_ _*✨(6) जिसके साथ खाना खाता है जबतक वह न आये, खाना शुरू न करे कि तन्हा खाना अच्छा नहीं और खाने में जितने अफराद ज़्यादा होंगे, उतनी ही बरकत ज़्यादा होगी। हज़रत अनस रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अकेले हरगिज़ खाना तनावुल न फ़रमाते थे।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 86*_ _*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC,

खाने से पहले के आदाब 86

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 086* 🍌,🍇,🍎,🍲,🍖,🍔,🍗,🍓,🍱                 _*✨खाने से पहले के आदाब ✨*_         _*✨(1) दोनों हाथ, मुँह धोकर खाना। हदीस शरीफ़ में है कि जो कोई खाने से पहले हाथ धोया करे वह इफलास व तंगदस्ती से बेफ़िक्र रहेगा।*_ _*✨(2) खाना दस्तरख्वान पर रखना। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसा ही किया करते थे, क्योंकि सफ़रह यानी (दस्तरख्वान) सफ़र याद दिलाता है और सफ़रे दुनिया सफ़रे आख़िरत याद दिलाता है और दस्तरख्वान पर खाना तवाज़ो व इनकिसारी से करीब है। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दस्तरख्वान पर ही खाना तनावुल फ़रमाते थे।*_ _*✨(3) नियत यह हो कि इबादत की कुव्वत के लिए खाता हूं ख्वाहिश के लिए नहीं। इसकी अलामत यह है कि थोड़ा खाने इरादा करे, ज़्यादा खाना इबादत से रोकता है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया छोटे-छोटे चन्द लुकमे जो आदमी की पीठ सीधी रखें, काफ़ी हैं, अगर इस ...

_दोस्त व अहबखब और दीनी भाईयों के साथ_* खाना खाने की फज़ीलत 84

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 084*        *_दोस्त व अहबखब और दीनी भाईयों के साथ_*            _*✨खाना खाने की फज़ीलत ✨*_ _*📚हदीसः- लोगों ने अर्ज़ की या रसूलल्लाह! हम खाते हैं और पेट नहीं भरता। इरशाद फ़रमाया "शायद तुम लोग अलग-अलग खाते हो। अर्ज़ की, हाँ, फ़रमाया "इकट्ठे होकर खाया करो और बिस्मिल्ला पढ़ो, खाने में बरकत होगी।"*_ _*📚हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "खाने में बेहतर वह है जिसमें खाने वाले ज़्यादा हों।"*_ _*📚हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः "जो शख्स किसी मुसलमान भाई को पेट भर खाना खिलाए या पानी पिलाए, हक़ तआला उसको दोज़ख की आग से सात खंदक दूर रखेगा और हर एक खंदक के दरमियान पांच सो बरस की मुसाफ़त है।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 84*_                   _*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 ...

दोस्त व अहबाब या दीनी भाई की ज़्याफ़त करना 85

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 085* _*💫दोस्त व अहबाब या दीनी भाई की ज़्याफ़त करना और उसके साथ खाना खाना भारी मिक़दार में सदक़ा करने से अफ़ज़ल है । नीज़ खाने में बरकत होती है , क़यामत के दिन उस खाने का हिसाब नहीं होगा और अल्लाह तआला खिलाने वालों के लिए फल का दरवाज़ा कुशादा फ़रमा देता है । लिहाज़ा हमें चाहिए कि मोमिन भाईयों को खिलाएं और उनके साथ खूद भी खाएं ।*_  _*📚हदीस शरीफ़ में है कि तीन चीज़ों का बन्दे से हिसाब नहीं लिया जायगा एक तो वह चीज़ जो सहरी में खायेगा दूसरी जिससे रोज़ा इफ्तार परेगा तीसरा जो कुछ दोस्तों के साथ खायेगा हज़रत ह़सन बसरी अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं बन्दा जो कुछ खाता पीता है और अपने माँ बाप को खिलाता है उसका हिसाब होगा और जो खाना दोस्तों के साथ खाता है उसका हिसाब न होगा । इसलिए बअज़ बुजुर्गाने दीन से मनकूल है कि वह मेहमान के सामने ज़्यादा से ज़्यादा खाना पेश करते थे ताकि जो खाना बच जाए उससे खुद खाएं और घर वालों को खिलाएं*_ _*✨बिलखुस...

मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत83

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 083*                                   _*✨मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत ✨*_ _*📚 हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः"मेहमान अपना रिज़्क लेकर आता है और खिलाने वालों के गुनाह लेकर जाता है, उनके गुनाह मिटा देता है।"*_ _*✨ग़र्ज़ कि मेहमान नवाज़ी करने में बड़ी फ़ज़ीलत है। हज़रत अनस रदियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं: "जिस घर में मेहमान न आये, उसमें रहमत के फ़रिश्ते दाखिल नहीं होते। जब तुम्हारे घर कोई मेहमान आये तो उसके लिए तकल्लुफ़ न करो, जो कुछ हाज़िर हो उसके सामने पेश करो।"*_ _*📚 हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः"मेहमान के लिए तकल्लुफ़ न करो क्योंकि जब तकल्लफ़ करोगे तो उसके साथ दुश्मनी रखोगे और जो शख्स मेहमान से दुश्मनी रखेगा, वह खुदा के साथ दुश्मनी रखेगा और जो खुदा के साथ दुश्मनी रखेगा, उसका अंजाम बुरा होगा।"*_ _*📚सलिक़...

मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत82

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 082*                                 _*✨मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत ✨*_ _*📚 हदीसः- हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः "उस आदमी में कोई भलाई नहीं जो मेहमान नवाज़ नहीं।"*_ _*📚 हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः "जब तुम्हारे घर मेहमान आये तो उसकी ताज़ीम करो।"*_ _*📚 हदीसः-- हज़रत इब्ने अब्बास रदियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जिस घर में खाना खिलाया जाता है, भलाई उसकी तरफ़ कोहान की तरफ जाने वाली छुरी से ज़्यादा तेजी के साथ दोड़ती है।"*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 83*_           _*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_ 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC

मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत 81

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 081*                                   _*✨मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत ✨*_ _*💫मेहमान नवाज़ी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम बगैर मेहमान के खाना तनावुल न फरमाते थे आपके घर कोई मेहमान न होता तो आप मेहमान की तलाश में एक दो मील दूर निकल जाते थे , जबतक मेहमान न मिलता खाना तनावुल न फ़रमाते मेहमान का आना रह़मते खुदावन्दी के नुज़ूल का ज़रिया है मेहमान ज़ेहमत नहीं बल्कि खुदा की रहमत लेकर आता है जिस घर में मेहमान को खाना खिलाया जाता है , वहाँ खुदा की रह़मत उमड़ आती है ।मेहमान खुद अपनी किस्मत का खाता है इसलिए मेहमान के आने पर इज़हारे मसर्रत करना चाहिए मेहमान को हिकारत की नज़र से देखना और उसके आने पर नाखुश होना इफ़लास व तंगदस्ती का सबब है।*_ _*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 82*_             _*🧮 ...

खाने का बयान 80

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 080*                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ __*📜मसअ्लाः- सेर होकर खाना ताकि नवाफ़िल कसरत से पढ़ सकेगा और पढ़ने-पढ़ाने में कमज़ोरी पैदा न होगी मुसतहब और सेरी से ज़्यादा खाना मगर इतना ज़्यादा नहीं कि शिकम खराब हो जाए मकरूह है। इबादत गुज़ार आदमी को इख्तियार है कि बक़दरे मुबाह तनावुल करे या बक़दरे मनदूब मगर उसे यह नियत करना चाहिए कि इसलिए खाता हूं कि इबादत की कुव्वत पैदा होगी, इस नियत से खाना एक किस्म की ताअ़त है और खाने से मक़सद तलज्जुज़ व तनउम न हो कि यह बुरी सिफ़त है।*_  _*📜मसअ्लाः- रियाज़त व मुजाहिद...

खाने का बयान 79

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 079* *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📜मसअ्लाः- इज़तिरार की हालत में जबकि जान जाने का अन्देशा है अगर हलाल चीज़ खाने के लिए नहीं मिलती तो हराम चीज़ या मुरदार या दूसरे की चीज़ खाकर अपनी जान बचाए और इन चीज़ों के खा लेने पर मुवाख़िज़ा ( पकड़ ) नहीं बल्कि न खाकर मर जाने में मुवाखिज़ा है , अगरचे दूसरे की चीज़ खाने में तावान देना पड़े ।*_ _*📜मसअ्लाः- यूंही प्यास से हलाक होने का अन्देशा है तो कोई भी चीज़ पी कर अपने को हलाकत से बचाना फ़र्ज़ है । पानी नहीं है और शराब मौजूद है और मालूम है कि इसके पी लेने से जान बच जाएगी तो इतनी पी ले जिससे यह अन्देशा जाता रहे ।*_ _*📚सलिक़ा ...

खाने का बयान 78

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 078*   *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📜मसअ्लाः- भूक से कम खाना चाहिए और पूरी भूक खा लेना मुबाह है यानी न सवाब है, न गुनाह क्योंकि इसका भी सही मक़सद हो सकता है कि ताकत ज़्यादा होगी। शहवत पैदा करने के लिए भूक से ज़्यादा खा लेना हराम है यानी इतना खा लेना जिससे मैदा खराब होने का अन्देशा हो ।*_ _*📜मसअ्लाः- रोज़े की कुव्वत हासिल करने के लिए या मेहमान का साथ देने केलिए इतना ज़्यादा खाना मुसतहब है जितने में मैदा खराब होने का अन्देशा न हो।*_ _*📜मसअ्लाः- भूक का इतना गल्बा हो कि न खाने से मर जाएगा तो इतना खा लेना जिससे जान बच जाए फ़र्ज़ है। इस सूरत में अगर नहीं खाया ...

खाने का बयान 77

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 077*               *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमायाः " खाने को ठण्डा करके खाओ , गर्म खाने में बरकत नहीं और खाने को न सूंघो कि यह चोपायों का तरीका है ।*_ _*📚हदीसः- हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रदियल्लाहु अन्हु से मरवी कि उन्होंने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इरशाद फ़रमाते सुनाः " जब आदमी अपने घर में दाखिल हो और दाखिल होने से पहले और खाने से पहले बिस्मिल्लाह कह ले तो शैतान अपनी जुर्रियत से कहता है कि अब तुम इस घर में न रात को रह सकोगे , न यहाँ खाने में शरीक हो सकोगे , अ...

खाने का बयान 76

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 076*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📚हदीस:- हज़रत अनस रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जब कोई खाना खाए या पानी पिये तो यह कह लेः*_ *بِسْمِ اللّٰهِ الَّذِیْ لَایَضُرُّ مَعَ اسْمِهٖ شَیْیٌ فِی الْاَرْضِ وَلَا فِی السَّمَآءِیَا حَیُّ یَا قَیُّوْم०* _*📝तर्जमा : अल्लाह के नाम से और अल्लाह की मदद से जिसके नाम के साथ कोई चीज़ ज़रर ( नुकसान ) देने वाली नहीं न ज़मीन में न आसमान में ऐ हय्यु ( अमर ) ऐ कय्यूम ( काइम रखने वाला ) फिर उसे कोई बीमारी न होगी अगरचे उसमें ज...

खाने का बयान 75

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 075*                     *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📚हदीस:- हज़रत आयशा सिद्दीका रदियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दौलतकदे में तशरीफ़ लाए, रोटी का टुकड़ा पड़ा हुआ देखा, आपने उसे लेकर साफ़ किया, फिर तनावुल फ़रमाया लिया और कहाः "ऐ आयशा! अच्छी चीज़ का एहतिराम करो कि यह चीज़ यानी रोटी वगैरह जब किसी कोम से भागती है तो लोट कर नहीं आती।"*_ _*📚हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः “आदमी ने पेट से ज़्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं भरा। इब्ने आदम को चन्द लुकमे काफ़ी हैं जो उसकी पीठ...

खाने का बयान 74

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 074*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..*_                         _*खाने का बयान*_ _*📚हदीसः- "हज़रत सलमान रदियल्लाहु अन्हु ने कहा मैंने 'तौरात' में , पढ़ा था कि खाने की बरकत का सबब इससे पहले वजू करना (यानी हाथ, मुंह धोना है) मैंने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इसका जिक्र किया तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "खाने की बरकत खाने से पहले और खाने के बाद वजू करने यानी हाथ, मुंह धोने में है।"*_ _*📚हदीस:- हज़रत जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से मरवी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः तहक़ीक़ कि शैतान तुम्हारे हर काम में ह...

खाने का बयान 73

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 073*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..🍇*_                      _*🍱खाने का बयान 🍱✨*_ _*📚हदीसः- हज़रत आयशा सिद्दीक़ा रदियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः*_ _*"जब कोई आदमी खाना खाए तो बिस्मिल्लाह पढ़े और अगर शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाए तो यूंकहे “बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आखिरहू"*_ _*📚 हदीस:- उमय्या बिन मख़शी से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तशरीफ़ फ़रमा थे और एक आदमी बगैर बिस्मिल्लाह पढ़े खाना खा रहा था, जब खाना खा चुका सिर्फ एक लुकमा बाकी रह गया तो जब यह लुकमा उठाया और पढ़ा "बिस्मिल्लाहि अव्व...

खाने का बयान 72

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 072*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                       _*🍗..🍔..🍓..🥐..🍖..🍳..🍎..🍌..🍇*_                      _*🍱खाने का बयान 🍱✨*_ _*कुरान में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:*_ _*"हलाल व पाक खाना खाओ और अच्छे अमल करो।"*_ _*✨जो कोई इस इरादे से खाना खाए कि मुझे इल्म व अमल की क़ुव्वत और आख़िरत की राह चलने की क़ुदरत हासिल हो, उसका खान पीना भी इबादत है। इसलिए रसूले कायनात सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि मुसलमान को हर चीज़ पर सवाब मिलता है। यहाँ तक कि उस लुकमे पर भी जो अपने मुंह या अपने बाल बच्चों के मुंह में डाले। बसा औक़ात खाना खाना ज़रूरी व फर्ज़ हो जाता है। लिहाजा हमें चाहिए कि जब खाना खाएं...

तलाक़ की क़िस्में 71

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 071*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                      _*✨तलाक़ की क़िस्में ✨*_ _*📖 मसअ्लाः- तलाक देना जाइज़ है मगर बेवजह शरई मकरूह व ममनू है और शरई वजह हो तो मुबाह बल्कि बअज़ सूरतों में मुस्तहब है । मसलन औरत अपने शौहर को या औरों को तकलीफ देती है या नमाज़ नहीं पढ़ती । हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदियल्लाहु अन्ह फ़रमाते कि बेनमाज़ी को तलाक दे दूं अगरचे उसका मेहर ज़िम्मे बाक़ी हो , इस हालत के साथ दरबारे खुदाबन्दी में मेरी पैशी हो तो यह इससे बेहतर है कि उसके साथ ज़िन्दगी बसर करूं । और बअज़ सूरतों में तलाक़ देना वाजिब है । मसलन शौहर नामर्द या हिजड़ा है या उस पर किसी ने जादू या अमल कर दिया है कि जिमाअ़् ( सोहबत ) करने पर कादिर नहीं और इसके इज़ाले की भी कोई सूरत नज़र...

तलाक़ की क़िस्में 70

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 070*                                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                      _*✨तलाक़ की क़िस्में ✨*_ _*💫 तलाक़ हुक्म व नतीजे के एतिबार से तीन क़िस्म पर है:*_ _*1.रजई, 2.बाइन, 3.मुग़ल्लज़ा।*_ _*1. रजई :- वह तलाक़ है जिससे औरत फ़िलहाल निकाह से नहीं निकलती, हाँ, अगर इद्दत गुज़र जाए और रजअ़्त न करे तो अब निकाह से निकल जाएगी। इसमें शौहर को इद्दत के अन्दर लौटाने का हक़ रहता है।*_  _*2. बाइन :- वह तलाक़ है जिससे औरत निकाह से फ़ौरन निकल जाए, इसमें शौहर बीवी की रजामन्दी से दोबारा निकाह कर सकता है, इद्दत के अन्दर हो या इद्दत के बाद।*_ _*3. मुगल्लज़ा :- वह तलाक़ है जिसमें औरत निकाह से फौरन इस तरह से निकल जाती है कि बगैर हला...

तलाक़ का बयान 69

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 069*                  *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                      _*✨तलाक़ का बयान ✨*_ _*📚हदीस:- हज़रत मआ़ज रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशादा फ़रमायाः*_ _*"ऐ मआज़! अल्लाह तआला ने कोई चीज़ गुलाम अज़ाद करने से ज़्यादा पसंदीदा रूए ज़मीन पर पैदा नहीं की और चीज़ ज़मीन पर तलाक़ से ज़्यादा नापसंदीदा पैदा न की।"*_ _*📚हदीसः- हज़रत जाबिर रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलल्ला सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः*_ _*"इबलीस अपना तख्त पानी पर बिछाता है और अपने लश्कर को भेजता है और सबसे ज़्यादा मर्तबे वाला उसके नज़दीक वह है जिसका फ़ितना बड़ा होता है। उनमें एक आकर कहता है 'मैंने यह किया, यह किया।' इबलीस कहता है 'तूने कुछ नहीं किया।' दूसरा आत...

तलाक़ का बयान 68

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 068*                                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                      _*✨तलाक़ का बयान ✨*_ _*कुर्आन में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:*_ _*"यह तलाक़ दो बार तक है, फिर भलाई के साथ रोक लेना है या निकोई के साथ छोड़ देना है।"*_ _*(सूरह अलबकरह)*_  _*📚हदीसः- हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर रदियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः*_ _*"तमाम हलाल चीज़ों में सबसे ज़्यादा नापसंद चीज़ अल्लाह के नज़दीक तलाक है।"*_  _*यानी अगरचे अशद हाजत के वक़्त इसको इस्तेमाल करने की ज़रूरत है लेकिन फिर भी यह काम अल्लाह को पसंद नहीं।*_  _*📚हदीस:- हज़रत सोबान रदीयल्लाहु अन्हु से मरवी है क...

तलाक़ का बयान 67

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 _*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_                              *✍️ पोस्ट न. 067*                    *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*                      _*✨तलाक़ का बयान ✨*_ _*💫 मतलब यह है कि अगर औरत में कोई कमी हो जिसकी बिना पर वह शौहर को पसंद न आये तो भी यह मुनासिब नहीं कि शौहर फौरन दिल बर्दाश्ता होकर तलाक देने पर आमादा हो जाए। बसा औकात ऐसा भी होता है कि औरत में इसके अलावा दीगर बहुत सी खूबियां होती हैं जो इज़दिवाजी ज़िन्दगी के लिए बड़ी अहमियत रखती हैं। लिहाजा यह बात शरीअत को बिल्कुल पसंद नहीं कि आदमी छोटी-छोटी बातों पर इज़दिवाजी तअल्लुकात ख़तम कर दे। तलाक तो बिल्कुल आखिरी रास्ता है जिसको बदरजए मजबूरी काम में लाना चाहिए। वह भी अगर ज़रूरत है तो एक ही तलाक़ दे ताकि बाद में मेल मिलाप या सुलह की सूरत में 'रजअत' या सिर्फ निकाह ही से काम चल जाए। वरना ती...