खाने का बयान 75
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 075*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
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_*खाने का बयान*_
_*📚हदीस:- हज़रत आयशा सिद्दीका रदियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दौलतकदे में तशरीफ़ लाए, रोटी का टुकड़ा पड़ा हुआ देखा, आपने उसे लेकर साफ़ किया, फिर तनावुल फ़रमाया लिया और कहाः "ऐ आयशा! अच्छी चीज़ का एहतिराम करो कि यह चीज़ यानी रोटी वगैरह जब किसी कोम से भागती है तो लोट कर नहीं आती।"*_
_*📚हदीसः- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः “आदमी ने पेट से ज़्यादा बुरा कोई बर्तन नहीं भरा। इब्ने आदम को चन्द लुकमे काफ़ी हैं जो उसकी पीठ को सीधा रखें। अगर ज़्यादा खाना ज़रूरी हो तो तिहाई पेट खाने के लिए और तिहाई पानी के लिए और तिहाई सांस के लिए।"*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 79/80*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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