खाने का बयान 78
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 078*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
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_*खाने का बयान*_
_*📜मसअ्लाः- भूक से कम खाना चाहिए और पूरी भूक खा लेना मुबाह है यानी न सवाब है, न गुनाह क्योंकि इसका भी सही मक़सद हो सकता है कि ताकत ज़्यादा होगी। शहवत पैदा करने के लिए भूक से ज़्यादा खा लेना हराम है यानी इतना खा लेना जिससे मैदा खराब होने का अन्देशा हो ।*_
_*📜मसअ्लाः- रोज़े की कुव्वत हासिल करने के लिए या मेहमान का साथ देने केलिए इतना ज़्यादा खाना मुसतहब है जितने में मैदा खराब होने का अन्देशा न हो।*_
_*📜मसअ्लाः- भूक का इतना गल्बा हो कि न खाने से मर जाएगा तो इतना खा लेना जिससे जान बच जाए फ़र्ज़ है। इस सूरत में अगर नहीं खाया यहाँ तक कि मर गया तो गुनाहगार हुआ, इतना खा लेना कि खड़े होकर नमाज़ पढ़ने की ताक़त आ जाए और रोज़ा रख सके तो इतनी मिकदार खा लेना ज़रूरी है और इसमें सवाब भी है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 81*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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