मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत 81
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 081*
_*✨मेहमान नवाज़ी की फज़ीलत ✨*_
_*💫मेहमान नवाज़ी हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत है हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम बगैर मेहमान के खाना तनावुल न फरमाते थे आपके घर कोई मेहमान न होता तो आप मेहमान की तलाश में एक दो मील दूर निकल जाते थे , जबतक मेहमान न मिलता खाना तनावुल न फ़रमाते मेहमान का आना रह़मते खुदावन्दी के नुज़ूल का ज़रिया है मेहमान ज़ेहमत नहीं बल्कि खुदा की रहमत लेकर आता है जिस घर में मेहमान को खाना खिलाया जाता है , वहाँ खुदा की रह़मत उमड़ आती है ।मेहमान खुद अपनी किस्मत का खाता है इसलिए मेहमान के आने पर इज़हारे मसर्रत करना चाहिए मेहमान को हिकारत की नज़र से देखना और उसके आने पर नाखुश होना इफ़लास व तंगदस्ती का सबब है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 82*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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