खाने का बयान 79
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 079*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
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_*खाने का बयान*_
_*📜मसअ्लाः- इज़तिरार की हालत में जबकि जान जाने का अन्देशा है अगर हलाल चीज़ खाने के लिए नहीं मिलती तो हराम चीज़ या मुरदार या दूसरे की चीज़ खाकर अपनी जान बचाए और इन चीज़ों के खा लेने पर मुवाख़िज़ा ( पकड़ ) नहीं बल्कि न खाकर मर जाने में मुवाखिज़ा है , अगरचे दूसरे की चीज़ खाने में तावान देना पड़े ।*_
_*📜मसअ्लाः- यूंही प्यास से हलाक होने का अन्देशा है तो कोई भी चीज़ पी कर अपने को हलाकत से बचाना फ़र्ज़ है । पानी नहीं है और शराब मौजूद है और मालूम है कि इसके पी लेने से जान बच जाएगी तो इतनी पी ले जिससे यह अन्देशा जाता रहे ।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 81*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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