खाने के वक़्त के आदाब 88

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 088*
                 

              _*✨खाने के वक़्त के आदाब ✨*_

_*'बिस्मिल्लाह' पढ़कर शुरू करना और खाने के बाद 'अलहम्दु लिल्लाह' पढ़ना। बेहतर यह है कि पहले निवाले में कहे 'बिस्मिल्लाह' दूसरे में 'बिस्मिल्लाहिर्रहमान' तीसरे " में मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम'। 'बिस्मिल्लाह' ज़ोर से कहे कि साथ वालों को अगर याद न हो तो उससे सुनकर उन्हें याद आजाए। दाहिने हाथ से खाए, नमक से इब्तिदा करे और नमक ही पर खत्म करे यानी पहले नमकीन खाना खाये और फिर बाद में भी नमकीन चीज़ खाये। इससे सत्तर (70) बीमारियां दफ़ा हो जाती हैं। तकिया लगाकर न खाए कि यह अदब के खिलाफ है।*_

_*हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि मैं तकिया लगाकर खाना नहीं खाता कि मैं बन्दा हूँ और बन्दों की तरह बैठता और बन्दों के तरीकों से खाता हूँ। नंगे सर न खाएं कि यह अहले हुनूद का तरीका है और ख़िलाफ़े सुन्नत। बायें हाथ को ज़मीन पर टेक देकर खाना मकरूह है। अगर शुरू में 'बिस्मिल्लाह' कहना भूल जाए तो जब याद आ जाए 'बिस्मिल्लाहि फ़ी अव्वलिही व आखिरिही कह ले। खाने के वक़्त अच्छी तरह बायां पांव बिछा दे और दाहिना पांव खड़ा कर दे या सुरीन पर बैठे और दोनों घुटने खड़े रखे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यही दो तरीके साबित हैं।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 86/87*_           

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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