रूखसती का बयान 12
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 012*
_*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
_*💗रूखसती का बयान 💗*_
_*✨जब कोई शख्स अपनी लड़की की शादी करे तो रूखसती वक़्त अपनी लड़की को अपने पास बुलाये । इसके बाद एक प्याले थोड़ा सा पानी लेकर यह दुआ पढ़कर प्याले में दम करे :*_
_*٠اَللّٰہُمَّ اِنِّیْ اُعِیْذُ ھَابِکَ وَذُرِّ یَّتَهَا مِنَ الشَّیْطٰنِ الرَّجِیْمِ٠*_
_*अल्लाहुम्मा इन्नी अउईजु हाबिक व जुर्रियतहा मिनश्शेतानिर्रजीम "*_
_*📚तर्जमा : - ऐ अल्लाह ! में इस लड़की को और इसकी होने वाली औलाद को तेरी पनाह में देता हूँ शैतान मरदूद से । फिर उस पानी को दुल्हन के सर और सीने और पीठ पर छींटे मारे , इसके बाद दूल्हा को भी बुलाए और प्याले में दूसरा पानी लेकर यह दुआ पढ़कर दम करे :*_
_*٠اَللّٰہُمَّ اِنِّیْ اُعِیْذُہٗ بِکَ وَذُرِّ یَّتَهٗ مِنَ الشَّیْطٰنِ الرَّجِیْمِ٠*_
_*अल्लाहुम्मा इन्नी उईजुहू बि क व जुर्रियतहू मिनश्शेतानिर्रजीम " फिर दुल्हा के सर और सीने और पीठ पर छींटे मारे और इसके बाद रूखसत करे ।*_
_*📚( हिस्ने हसीन पेज 249 )*_
_*💫दुल्हन जब सुसराल पहुंचे तो सुसराल वालों को चाहिए कि नई दुल्हन का पांव धोकर पानी को मकान के चारों तरफ छिड़के कि यह मुस्तहब और बाइसे बरकत है ।*_
_*📚 ( फतावा रज़विया जिल्ट 1 , पेज 455 )*_
_*✨शबे ज़िफाफ के आदाब ✨*_
_*💫जब दूल्हा दुल्हन के पास जाये तो सबसे पहले दूल्हा - दुल्हन दोनों वुजू करें , फिर दो रकअत नमाजे शुकरान पढ़ें । अगर दुल्हन हैज़ की । हालत में हो तो नमाज़ न पढ़े लेकिन दूल्हा ज़रूर पढ़े । हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रदियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि एक शख्स ने उनसे बयान किया कि मैंने एक जवान लड़की से निकाह कर लिया है और मुझे अन्देशा है कि वह मुझे पसन्द नहीं करेगी । हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रदियल्लाहु अन्हु ने फ़रमायाः " मुहब्बतो उल्फ़त खुदा की तरफ़ से होती है और नफ़रत शैतान की तरफ से । जब तुम अपनी बीवी के पास जाओ तो सबसे पहले उससे कहो कि वह तुम्हारे पीछे दो रकअत नमाज़ पढ़े । इन्शा अल्लाह तुम उसे मुहब्बत करने वाली और वफ़ा करने वाली पाओगे ।*_
_*📚( गुनिय्या पेज 115 )*_
_*🤲🏻शबे ज़िफाफ की खास दुआ 🤲🏻*_
_*✨नमाज़ अदा करने के बाद दूल्हा अपनी दुल्हन की पैशानी के ऊपर | के थोड़े से बालों को अपने सीधे हाथ से नरमी के साथ महब्बत भरे अन्दाज़ में पकड़े और यह दुआ पढ़ेः*_
*_٠اَللّٰہُمَّ اِنِّیْ اَسْئَلُکَ مِنْ خَیْرِ ھَاوَ خَیْرِ مَا جَبَلْتَهَا عَلَیْهِ وَاَعُوْذُبِکَ مِنْ شَرِّ ھَاوَشَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَیْهِ ٠_*
_*अल्लाहुम्मा इन्नी असअलु क मिन खैरिहा व खैरि मा जबलतहा अलैहि व अऊजु बि क मिन शर्रि हा व शर्रि मा जबलतहा अलैहि " ।*_
_*📝तर्जुमा : - ऐ अल्लाह ! मैं तुझ से इसकी भलाई और इसके । अखलाक की भलाई का सवाल करता हूँ और इसके अब आदात के शर से तेरी पनाह चाहता हूँ ।*_
_*📚( अबू दाऊद शरीफ़ पेज 293 )*_
_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दो रकअत नमाज़ और इस दुआ को पढ़ने की बरकत से मियां - बीवी के दरमियान इत्तिहादो इत्तेफाक और मुहब्बत कायम रखेगा और अगर औरत में कोई कमी व बुराई होगी तो उसे दूर फ़रमा कर उसके ज़रिये नेकी फैलायेगा और औरत हमेशा शौहर की ख़िदमत गुज़ार और फ़रमां बरदार रहेगी ।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 26/27/28*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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