शौहर के हुकूक 13

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 013*

                 _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_

                 _*💗शौहर के हुकूक 💗*_

_*📓कुर्आन में : - अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है : " मर्द अफ़सर हैं औरतों पर ।*_
_( सूरह अलनिसा )_ 

_*📚हदीस : - हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने औफा रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने फरमाया : " अगर मैं किसी को हुक्म करता कि गैर खुदा के लिए सजदा करे तो हुक्म देता कि औरत अपने शौहर को सजदा करे । कसम है उसकी जिसके कब्ज - ए - कुदरत में मुहम्मद ( सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) की जान है , औरत अपने परवरदिगार का हक़ अदा न करेगी , जबतक शौहर के कुल हक अदा न करे ।*_ 

_*📚( इब्ने माजा पेज 133 )*_

_*📚हदीस : - हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः " औरत पर सब आदमियों से ज़्यादा हक़ उसके शौहर का है और मर्द पर उसकी माँ का ।*_ 

_*📚हदीस : - हज़रत मआज़ बिन जबल रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः " औरत मज़ा न पायेगी जब तक कि शोहर का हक अदा न करे ।*_

_*📚( बहारे शरीअत हिस्सा 7 , पेज 89 , 90 )*_

_*🕋अल्लाह तआला ने शौहरों को बीवियों पर हाकिम बनाया है और उसे बहुत बड़ी फ़ज़ीलतो बुर्जुगी दी है । इसलिए हर औरत पर फ़र्ज़ है कि वह अपने शौहर का हर हुक्म माने और खुशी बख़ुशी अपने शौहर के हर हुक्म की ताबेदारी करे । याद रखो ! शौहर को राजी व खुश रखना बहुत बड़ी इबादत है और शौहर को नाखुश और नाराज़ रखना बहुत बड़ा गुनाह है । हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यह भी फ़रमाया है कि " जिस औरत को मौत ऐसी हालत में आये कि मरते वक़्त उसका शौहर उससे खुश हो तो वह औरत जन्नत में जायेगी और यह भी फ़रमाया है कि जब कोई मर्द अपनी बीवी को अपनी हाजत पूरी करने के लिए बुलाये तो उसे फ़ौरन जाना चाहिए ख्वाह वह तनूर ही पर क्यों न हो । दूसरी हदीस में है अगर तुम में से कोई अपनी बीवी को बिस्तर पर बुलाये और वह न आये और उसका शोहर तमाम रात गम और गुस्से में बसर करे तो फ़रिश्ते सुबह तक उस औरत पर लानत भेजते रहते हैं ।*_

_*📚( तिरमिजी जिल्द 1 , पेज 138 )*_

_*📚हदीस शरीफ़ का मतलब यह है कि औरत को चाहिए कितने भी ज़रूरी काम में मशगूल हो शौहर के बुलाने पर सब कामों को छोड़ कर शौहर की ख़िदत में हाज़िर हो जाय ।*_

_*📚हदीस : - हज़रत अबु हुरैरह रदियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " जो औरत अपने शौहर को उसके काम यानी जिमाअ से रोक देती है , उस पर दो कीरात गुनाह होता है और जो मर्द अपनी औरत की हाजत पूरी नहीं करता उस पर एक कीरात गुनाह होता है ।*_ 

_*📚( गुनिय्या पेज 116 )*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 28/29/30*_  

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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