औरतों के शरई हुकूक मर्द पर चार किस्म के हैं 18

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 018*

 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

                    _*🌹बीवी के हुकूक 🌹*_

*✨औरतों के शरई हुकूक मर्द पर चार किस्म के हैं✨*

*(1) खाना जैसा खुद खाये उसे भी खिलाये।*
*(2) लिबास देना यानी जिस मैयार के कपड़े खुद पहने उसे भी पहनाये।*
*(3) मकान कि हस्बे हैसियत उसके रहने के लिए दे।*
*(4) हमबिस्तरी करना यानी निकाह के बाद एक बार जिमाअ् करना औरत का हक़ है ।*

*अगर एक बार भी न कर सके तो औरत के दावे पर काज़ी मर्द को साल भर की मोहलत देगा । अगर इसमें भी हमबिस्तरी न हो तो काज़ी तफरीक कर देगा। इसके बाद गाह बगाह वती (सम्भोग) करना दयानतन वाजिब है कि उसे परेशान नज़री न पैदा हो और उसकी रज़ा के बगैर चार माह तक तर्के जिमाअ् बिला उज्र सहीह शरीअ़ी नाजाईज़ ।*

*"अगर मर्द जिमा पर कादिर है, फिर भी जिमा नहीं करता ख्वाह इब्तिदाअन ख्वाह तर्के मुतलक का इरादा कर लिया है और औरत को उस से ज़रर है तो काज़ी मजबूर करेगा कि जिमअ् करे या तलाक दे। अगर न माने तो कैद करेगा। फिर भी न मानेगा तो मारेगा, यहां तक कि दो बातों में से एक करे।"*
_📓(फतावा रज़विया जिल्द 5, पेज 907)_

*औरत को बिला किसी बड़े कुसूर के हरगिज़-हरगिज़ न गरे। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः "कोई शख्स औरत को इस तरह न मारे जिस तरह अपने गुलाम को मारा करता है। फिर दूसरे वक़्त उस से सोह़बत भी करे।"*

_📚(मिशकात जिल्द 2, पेज 280)_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 34/35*_
        
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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