जिमाअ़् का बयान21

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 021*
                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

                   _*🌹जिमाअ़् का बयान🌹*_
                                *{पार्ट 1️⃣ }*

_*✨जिमाअ़् (हमबिस्तरी) की ख्वाहिश एक फ़ितरी (Natural) जज़्बा है जो हर ज़ीरूह में खिलक़तन पाया जाता है। इसे बताने की ज़रूरत नहीं होती। हर एक अपनी नौअ़ की मादा की तरफ तबई एतबार से माइल होता है और यह जज़्बा ही इज़्दिवाजी ज़िन्दगी और जिन्सी तअल्लुकात की जान है। जब इश्क व मोहब्बत का जज़्बा हैवानात में पाया जाता है और वे भी अपनी मिलने की ख्वाहिश पुरी करते हैं । नर को मादा की तलाश रहती है और मादा को नर की तो फिर इन्सान जो जज़्बात का मअदिन है उसका दिल जिमाअ़् और ख्वाहिशे विशाल से क्योंकर खाली रह सकता है? और वह औरत जैसी सिनफे नाजूक से क्यों न लुत्फ़ अन्दोज़ हो?*_

_*💫इमाम ग़ज़ाली फरमाते हैं:*_

_*✨जिमाअ़् की ख्वाहिश को इन्सान पर मुसल्लत कर दिया गया है ताकि नस्ले इन्सानी की बक़ा के लिए वह तुम रेज़ी करे । जिमा जन्नत की लज़्ज़तों में से एक लज्जत है ।*_
_*📚(कीमिया ए सआदत पेज 496)*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 36/37*_            

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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