जिमाअ़् के फायदे 22
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 022*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨जिमाअ़् के फायदे✨*_
*{पार्ट 2️⃣ }*
_*जिमाअ़् के मुतअल्लिक याद रखना चाहिये कि जब तक शहवत ग़ालिब न हो और मनी मुस्तअिद न हो, जिमाअ़् करना मुनासिब नहीं लेकिन जब वह हालत पाई जाए तो फ़ौरन मनी खारिज करनी चाहिये। जिस तरह रद्दी फुला पेशाब पाखाना से खारिज किया जाता है क्योंकि उस वक़्त मनी के रोकने मे बड़े नुक्सान का अन्देशा है।*_
_*📚(मुजर्राबात सुयूती पेज 40)*_
_*✨उम्दा जिमाअ वह कहलाता है जिसका नतीजा दिल की ताज़गी और तबीअत को फ़रहतो सुरूर हो। बुरा जिमाअ़् वह है जिसका नतीजा लर्ज़ा व तंगीए नफ़्सो दिल की कमजोरी और तबीअत का मत्लाना और महबूबा को पसंद न आना हो। (मुजरा बाते सुयूती पेज 41) जिमाअ़् सिर्फ मज़ा लेने या शहवत की आग बुझाने की नियत से न हो बल्कि यह नियत हो कि ज़िना से बचूंगा और औलाद स्वालेह व नेक सीरत पैदा होगी। अगर इस नियत से जिमाअ़् करेगा तो सवाब भी पायगा ।*_
_*📚(कीमिया ए सआदत पेज 255)*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 40*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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