कसरतें जिमअ् के नुक़सानात*{पार्ट 1️⃣ } 33
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 033*
_*💔कसरतें जिमअ् के नुक़सानात💔*_
*{पार्ट 1️⃣ }*
_*📖मसअलाः- ज़िन्दगी में एक मर्तबा जिमाअ़् करना क़ज़ाअन वाजिब है हद मुकर्रर नहीं , इतना तो हो कि औरत की नज़र औरों की तरफ न उठे और इतनी कसरत भी जायज़ नहीं कि औरत को ज़रर ( नुकसान ) पहुंचे ।*_
_*💞मुबाशरत से जो चीज़ निकलती है वह दरअस्ल रोगने हयात है कि चिरागे उम्र उसी से रौशन और कायम रहता है । उसके अन्दर यह सलाहिय्यत होती है कि जुज़्वे बदन बन जाय , उसके निकलने से जिस कद्र कमज़ोरी महसूस होती है , किसी गलीज़ जिस्मानी चीज़ के निकलने से नहीं होती । जो लोग औरत को सिर्फ अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशात की तक्मील का ज़रिया समझते और महज़ शहवत परस्ती की वजह से कसरते जिमाअ़् के आदी बन जाते हैं , वे अपनी सेहतो ज़िन्दगी के सख्त दुश्मन हैं । उन्हें ख़तरनाक से ख़तरनाक बीमारी से दो चार होना पड़ता है ।*_
_*जैसेः👉🏻 बदन में हरारत का बिल्कुल कम हो जाना , जिस्म का दुबला हो जाना , काहिली और सुस्ती का छा जाना , समाअतो बसारत ( सुन्ने , देखने ) में कमी आ जाना , दिमाग में कमज़ोरी व इख़्तिलाल का आ जाना , पिन्डलियों में दर्द पैदा हो जाना , दायमी कब्ज की शिकायत होना , मेदे की कमज़ोरी , बद - हज़्मी , गन्दा जेहनी का पैदा हो जाना , जुअफे बाह , जिरयान , सुझते इन्जाल और नामर्दी की शिकायत हो जाना , रअशा ( कपकपाहट ) , मिर्गी , फालिज की बीमारी का लाहिक़ होना । अलग़रज़ कसरते जिमाअ़् से इस किस्म के हज़ारों मर्ज़ पैदा हो जाते हैं जो इन्सान की ज़िन्दगी को इस कदर तल्ख कर देते हैं कि वह ज़िन्दगी पर मौत को तरजीह देने लगता है ।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 50*_
*⚘🤲🏻 अपनी नेक दुआओं में याद रखें..✍🏻*
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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