इमामे अहले सुन्नत, सरकारे आला हज़रत इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी अलैहिर्रह़मा फरमाते हैं 26

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 026*
      
                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

                       *✨तरीका-ए-जिमाअ✨*
                                *{पार्ट 2️⃣ }*

_*✨इमामे अहले सुन्नत, सरकारे आला हज़रत इमाम अहमद रजा फाजिले बरेलवी अलैहिर्रह़मा फरमाते हैं:*_

_*"जिमाअ़् के वक़्त यह नियत हो*_
_*💫(1) तलबे वलदे स्वालेह ।*_
_*💫(2) बीवी का अदाए हक़ ।*_
_*💫(3) यादे इलाही और आमाले स्वालेहा के लिये अपने दिल को फारिग करना। न बिल्कुल बरहना हो न खुद, न औरत, बकिब्ला रू न पुश्त किब्ला, औरत चित हो और यह उकडूं बैठे। बोसो किनार, छेड़-छाड़ से शुरू करे। जब औरत को भी मुतवज्जह पाए । ये पढे कर:*_
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ جَنِّبْنَا الشَّیْطٰنَ وَ جَنِّبِ الشَّیْطَانَ مَارَزَقْتَنَا 
_*" बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम जन्निबनश्शैताना व जन्निबिश्शैताना मा रज़क़तना "*_

_*आगाज़ करे, उस वक़्त कलाम न करे और न औरत की शर्मगाह पर नज़र करे, फिर जब इन्ज़ाल की नौबत पहुँचे तो दिल ही दिल में यह दुआ पढ़े :*_
 اَللّٰہُمَّ لَا تَجْعَلْ لِلشَّیْطَانِ فِیْمَا رَزَقْتَنِیْ نَصِیْبًا
_*'अल्लाहुम्मा ला तजअ़ल लिश्शैतानि फीमा रज़कतनी नसीबन"*_

_*अगर कोई इस दुआ को पढ़ लेता है और उसके मुक़द्दर में बच्चे की विलादत है तो शैतान उस बच्चे को कभी ज़रर (नुकसान) न दे सकेगा।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 44/45*_
           
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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