बीवी के हुकूक 16

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 016*

                 _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_

                    _*🌹बीवी के हुकूक 🌹*_

_*✨इस्लाम से पहले औरतों का बहुत बुरा हाल था, दुनिया में औरतों की कोई इज़्ज़तो वक़अ़त ही नहीं थी। मर्दों की नज़रों में उनकी कोई हैसियत न थी । वे मर्दों की नफ़्स की ख्वाहिश पूरी करने का एक खिलौना थीं, दिन-रात मर्दों की किस्म-किस्म की खिदमतें करती थी । मगर जालिम मर्द फिर भी उन औरतों की कोई कदर नहीं करता था बल्कि जानवरों की तरह उनके साथ सुलूक किया करता था। उनका कोई मकाम न था। शौहर फ़क़्त अपनी खिदमत के लिए उन्हें खाना कपड़ा देकर उनसे गुलामों जैसा बर्ताव करता था बल्कि उन्हें जायदाद की तरह इस्तेमाल करता था लेकिन इस्लाम ने औरत को नीचे से ऊपर उठाया और उनके लिए हुकूक मुकर्रर किये गये। माँ-बाप, भाई-बहन के मालों में वारिस करार दिया गया! औरतों को मालिकाना हुकूक हासिल हो गये, गरज़ कि वे औरतें जो मर्दों की जूतियों से ज़्यादा जलीलो ख़्वार और इन्तिहाई मजबूरो लाचार थीं वे मर्दों के घरों की महिला बन गईं। अब न कोई मर्द बिला वजह औरतों को मार पीट सकता है, ना ही उनको घरों से निकाल सकता है बल्कि हर मर्द मज़हबी तौर पर औरतों के हुकूक अदा करने पर मजबूर है।*_

_*🕋कुर्आन- अल्लाह तआला इरशाद फ्रमाता है:*_

_*📝तर्जमा :- "और उनसे अच्छा बर्ताव करो"*_
_📓(सूरह अन्निसा)_

_*📝तर्जमा :- "और औरतों का भी हक ऐसा ही है जैसे उन पर है शरीअत के मुआफिक़ ।"*_
_📓(सूरह बकरह)_ 

_*📚हदीस:- हज़रत आयशा रदियल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः"ईमान में सबसे ज़्यादा कामिल वह शख्स है जिसके आदातो अखलाक सबसे अच्छे हों और अपनी बीवी के साथ सबसे ज्यादा नर्मी और अच्छा बर्ताव करता हो।"*_

_*📚(मिशकात शरीफ पेज 282)*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 32/33*_               

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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