अब हम जिमाअ के कुछ आदाब बयान करते हैं: 24

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 024*
                 
                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

_*🌹अब हम जिमाअ के कुछ आदाब बयान करते हैं:*_

_*💫(1) जिमाअ़् से पहले औरत से मुलाकात और छेड़-छाड़ करे ताकि औरत का दिल खुश हो जाय और उसकी मुराद आसानी से हासिल हो। खूब बोसो किनार जारी रखें यहाँ तक कि औरत जल्दी-जल्दी साँस लेने लगे और उसकी घबराहट बढ़ जाय और मर्द को अपनी तरफ ज़ोर से खींचे।*_

_*💫(2) मर्द को चाहिये कि अपनी औरत पर जानवरों की तरह न गिरे। सोहबत से पहले कासिद होता है। लोगों ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह! वह कासिद क्या है? आपने फरमाया "बोसो किनार।*_

_*💫(3) जिमाअ़्.करते वक़्त कलाम करना मकरूह है बल्कि बच्चे के गूंगे या तोतले होने का खतरा है। यूं ही उस वक़्त औरत की शर्मगाह पर नज़र न करे कि बच्चे के अन्धे होने का अन्देशा है और मर्द औरत कपड़ा ओढ़ लें, जानवरों की तरह बरहना न हों कि बच्चे के बेहया या बेशर्म होने का अन्देशा है।*_

_*✨हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुद को और अपनी बीवी को सर से पैर तक चादर या किसी कपड़े से ढांप लिया करते थे और आवाज़ पस्त करते थे और बीवी से फरमाते थे कि वक़ार के साथ रहो।*_

_*💫(4) हमबिस्तरी से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ना सुन्नत है मगर यह याद रहे कि सत्र खुलने से पहले पढ़ी जाय।*_

_*💫(5) जिमाअ़् के वक़्त किब्ला रू न हो, पोशीदा जगह में हो, किसी की नज़र के सामने न हो। हदीस शरीफ में है कि सरकार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया "जब तुम में से कोई अपनी बीवी से कुरबत करे तो पर्दा करे, बेपर्दा होगा तो फ़रिश्ते हया की वजह से बाहर निकल जायेंगे और उनकी जगह शैतान आ जाएगा। अब अगर कोई बच्चा हुआ तो शैतान की उसमें शिरकत होगी। जिमाअ़् के वक़्त यानी जिमाअ़् शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह ज़रूर पढ़ना चाहिये। अगर बिस्मिल्लाह न पढ़े तो इस सूरत में मर्द की शर्मगाह से शैतान लिपट जाता है और उस मर्द की तरह वह भी जिमाअ़् करता है।*_

_*💫(6) जिमा से पहले औरत को जिमाअ़् की तरफ रागिब करना मुस्तहसन है। अगर ऐसा न किया जाए तो औरत को नुक्सान पहुंचने का अंदेशा है, जो अक्सर अदावतो जुदाई तक पहुँचा देता है।*_

_*💫(7) हमबिस्तरी से पहले गुस्ल करना बेहतर है, वर्ना इस्तिन्जा और वुजू कर ले।*_

_*💫(8) जिमाअ के वक़्त बीवी के अलावा किसी गैर औरत का तसव्वुर हरगिज़ न करे। ऐसा करना सख्त गुनाह है और यह भी एक किस्म का ज़िना है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 41/42/43*_           

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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