तबीबों ( हकीमों ) की तहकीक के मुताबिक*_ 31

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 031*

                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

 _*✨तबीबों ( हकीमों ) की तहकीक के मुताबिक*_

_*👉🏻 ( 1 ) पेट भरा होने की हालत में मुबाशरत नहीं करना चाहिये कि इससे औलाद कुन्द ज़ेहन पैदा होगी ।*_ 

_*👉🏻 ( 2 ) ज़्यादा बूढ़ी औरत से भी जिमाअ़् नहीं करना चाहिये कि इससे बदन कमज़ोर और आदमी जल्द बूढ़ा हो जाता है ।*_ 

_*👉🏻 ( 3 ) खड़े होकर जिमाअ़् करने से बदन कमज़ोरो ज़ईफ़ हो जाता है ।*_ 

_*👉🏻 ( 4 ) थोड़ी - थोड़ी देर बाद जिमाअ़् करना सेहत के लिये नुकसान दह है । बल्कि दो मर्तबा की हमबिस्तरी में इतना वक्फा ( ठहरना ) होना चाहिये कि जिससे बदन हल्का मालूम हो और तबीअत में अच्छी तरह ख्वाहिश पैदा हो ।*_ 

_*👉🏻 ( 5 ) पेट भरा होने की हालत में अगर मुबाशरत की जाय तो सुरअ़ते इन्जाल का मर्ज़ लाहिक हो जाता है , मेअदा कमज़ोर और हाज़्मे की कुव्वत भी कमजोर हो जाती है ।*_ 

_*👉🏻 ( 6 ) सफ़र में जाने के इरादे के वक़्त हमबिस्तरी नहीं करनी चाहिये कि इससे इरादा कमजोर हो जाता है ।*_

_*👉🏻 ( 7 ) बुखार , नज़्ला , जुकाम , खांसी और दूसरी तकलीफ़ों की मौजूदगी में जिमाअ़् नहीं करना चाहिये ।*_

_*👉🏻 ( 8 ) सफ़र से आने के फौरन बाद जिमाअ़् नहीं करना चाहिये , जब तक कि सफ़र की थकावट , रंजो फ़िक्र दूर न हो जाय ।*_

_*👉🏻 ( 9 ) नशे की हालत में जिमअ़् नहीं करना चाहिये , वरना इससे बीवी को नफ़रत हो जायगी और औलाद भी लंगड़ी , लूली पैदा होगी ।*_ 

_*👉🏻 ( 10 ) एक बार सोहबत करने के बाद अगर उसी रात में दोबारा सोहबत करने का इरादा हो तो दोनों को चाहिये कि वुजू कर लें , अगर वुजू न कर सकें तो अपनी - अपनी शर्मगाह को धोलें । ऐन नमाज़ के वक़्त सोहबत नहीं करनी चाहिये । बुजुर्गाने दीन फ़रमाते हैं ' अगर इन वक़्तों में हमबिस्तरी करने से हम्ल ( गर्भ ) ठहर जाय तो औलाद नाफरमान पैदा होगी ।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 48/49*_
           
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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