उन रातों का बयान जिनमे मुबाशिरत ( संगत ) करना मना है*_ 32
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 032*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*🌕उन रातों का बयान जिनमे मुबाशिरत ( संगत ) करना मना है*_
_*✨हर महीने की पहली रात और चाँद की पन्द्रहवीं रात और महीने की आखिरी रात में जिमाअ़् न किया जाए कि इन रातों में शैतान जिमाअ़् के वक़्त हाज़िर होते हैं और कुछ यह कहते हैं कि इन रातों में शैतान जिमाअ़् करते हैं ।*_
_*⏳हफ़्ता और इतवार , मंगल और बुध की दरमियानी शब में हमबिस्तरी करने से बचना चाहिये कि इन रातों में हमबिस्तरी करने से अगर हम्ल ठहर जाए तो बच्चा बेहया , बदनसीब और मुफ़्लिसो हरीस पैदा होने के इमकानात हैं ।*_
_*💫इमाम ग़ज़ालो फरमाते हैं : रात के पहले हिस्से में सोहबत करना मकरूह है कि सोहबत के बाद पूरी रात नापाकी की हालत में सोना पड़ेगा ।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 49*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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