बेपर्दगी का बयान 114

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 114*


                 _*🔥बेपर्दगी का बयान 🔥*_

_*मुसलमान औरतों के लिए पर्दा बहुत ज़रूरी है और बेपर्दगी इन्तिहा दर्जे की बेहयाई व बेगैरती का सबब है।*_

_*कुर्आन में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है: "और अपने घरों में ठहरी रहो और बेपर्दा न रहो जैसे अगली जाहिलियत की बेपर्दगी।"*_

_*अगली जाहिलियत से मुराद कब्ले इस्लाम का ज़माना है। उस ज़माने में औरतें इतराती निकलती थीं, अपनी ज़ैब व ज़ीनत का इज़हार करती थीं ताकि गैर मर्द देखें और लिबास इस तरह पहनती थी जिन जिनसे के आज़ा अच्छी तरह न छुपते थे।*_

_*आज वे औरतें जो ज़र्क बर्क(तड़क-भड़क) लिबास में मलबूस होकर खिरामा खिरामा मटकती हुई अजनबी मर्दो की महफ़िलों, नामहरमों की मजलिसों और गैरों के मजमों में आती जाती हैं और अपनी इस आवारगी और बेहयाई पर ज़रा भी नहीं शर्मातीं।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 102/103*_

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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