बद निगाही का बयान 113

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 113*


                 _*🔥बद निगाही का बयान 🔥*_

_*✨ बुज़ुर्गाने दीन फरमाते हैं:*_

_*तमाम बुराईयों की इब्तिदा नज़र से होती है । पहले नज़र , नज़र से मिलती है , इसके बाद मुस्कुराहट होती है , फिर सलाम व कलाम , फिर वादा , फिर मुलाकात , फिर आपस में गुनाहों का दरवाज़ा खुल जाता है । हज़रत याहया अलैहिस्सलाम से लोगों ने पूछा कि ज़िना की इब्तिदा कहाँ से होती है ? उन्होंने फ़रमाया “ आँख से।*_

_*📚हदीसः- प्यारे आका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं : " मर्द का गैर औरतों को और औरत का गैर मर्दो को देखना आँखों का ज़िना है । पैरों से उसकी तरफ़ चलना , पैरों का ज़िना है । कानों से उसकी बात सुनना , कानों का ज़िना है । ज़बान से उसके साथ बातें करना , ज़बान का ज़िना है । दिल में नाजाइज़ मिलाप की तमन्ना करना , दिल का ज़िना है । हाथों से उसे छूना , हाथों का जिना है ।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 102*_
           
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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