बद निगाही का बयान 112

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 112*


                 _*🔥बद निगाही का बयान 🔥*_

_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम इरशाद फ़रमाते हैं : आँख भी शर्मगाह की तरह ज़िना करती है और आँख का ज़िना नज़र है । वह शख्स जो नज़र को बचाने की कुदरत नहीं रखता , उस पर वाजिब है कि शहवत को रियाज़त से ख़त्म करे । इसकी तदबीर यह है कि रोज़ा रखे , वरना निकाह करे ।*_

_*📚हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " निगाह इबलीस के तीरों में से एक तीर है जिसको ज़ेहर के पानी से बुझाया गया है । पस जो कोई खुदावन्द करीम के डर से अपनी निगाह को बचायगा उसको ऐसा ईमान नसीब होगा जिसकी हलावत वह अपने दिल में महसूस करेगा ।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 101*_

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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