पानी 'बिस्मिल्लाह' कह कर दायें हाथ से पीना चाहिए और तीन सांस में पिये 95
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 095*
_*📜मसअला:- पानी 'बिस्मिल्लाह' कह कर दायें हाथ से पीना चाहिए और तीन सांस में पिये। हर मर्तबा बर्तन को मुंह से हटा कर सांस ले, पहली और दूसरी मर्तबा एक-एक घूंट पिये और तीसरी सांस में जितना चाहे पी डाले। इस तरह पीने से प्यास बुझ जाती है और पानी को चूस कर पिये, गट-गट, बड़े-बड़े घूंट न पिये। जब पी ले तो 'अलहम्दु लिल्लाह' कहे।*_
_*💫फायदाः- खड़े होकर पानी पीना मना है, जैसा कि हदीस में गुज़रा लेकिन वजू के बचे हुए पानी को खड़े होकर पीना मुसतहब है। इसी तरह आबे ज़म ज़म को खड़े होकर पीना सुन्नत है। ये दोनों पानी इस हुक्म से मुसतस्ना(अलग) हैं और इसमें हिकमत यह है कि खड़े होकर जब पानी पिया जाता है तो वह फौरन तमाम आज़ा की तरफ़ सरायत कर जाता है और यह मुज़िर(नुकसानदह) है मगर ये दोनों पानी बरकत वाले हैं और इनसे मकसूद ही बरकत है। लिहाज़ा इनका तमाम आज़ा में पहुंच जाना फ़ायदामन्द है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 91/92*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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