रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जिसको दावत दी गई और उसने कबूल न की तो उसने अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी की।92
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 092*
_*📚हदीस:- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जिसको दावत दी गई और उसने कबूल न की तो उसने अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी की।"*_
_*📚हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जब तुम में से किसी को वलीमा के खाने के लिए बुलाया जाए तो ज़रूर जाए।"*_
_*✨इन हदीसों से मालूम हुआ कि दावत कबूल करना और दावत । जाना नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है। लिहाजी दावत मिलने पर दावत में जाना चाहिए। इसमें अपने मोमिन भाई को दिलजोई है और आपस में मेल मिलाप और महब्बत का ज़रिया है।*_
_*📜मसअलाः- दावते वलीमा कबूल करना उसी वक़्त सुन्नत है जबकि दावत में कोई मुनकिराते शरीअह ढोल, तमाशे, गाने, बजाने, लहव व लअब वगैरह न पाया जाता हो। बाक़ी आम दावतों का कबूल करना अफ़ज़ल है, जबकि न कोई मानेअ हो और न उससे ज़्यादा अहम काम हो।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 89/90*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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