जीनत का बयान 102

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 102*


                  _*✨जीनत का बयान ✨*_

_*📚हदीस:- हज़रते आयशा सिद्दीक़ा रदियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि हिन्द बिन्ते उक़बा ने अर्ज़ की या नबी अल्लाह! मुझे बैअ़त कर लीजिए, फ़रमायाः "मैं तुझे बैअत नहीं करूँगा जबतक तू अपनी हथैलिया को न बदल दे (यानी मेंहदी लगाकर उनका रंग न बदल दे) तेरे हाथ गोया दरिन्दे के हाथ मालूम हो रहे हैं यानी औरतों को चाहिए कि हाथों को रंगीन कर लिया करें।*_

_*📚हदीस:- एक औरत के हाथ में किताब थी, उसने पर्दे के पीछे से हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तरफ इशारा किया यानी हज़ूर को देना चाहा। हुजूर ने अपना हाथ खींच लिया आरय लिया और यह फ़रमायाः मालूम नहीं मर्द का हाथ है या औरत का।" उसने कहा "औरत का।" फ़रमाया "अगर औरत होती तो नाखुनो को मेंहदी से रंगे होती।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 96/97*_

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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