तलाक़ का बयान 66

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 066*
 
                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

                     _*✨तलाक़ का बयान ✨*_

_*💔निकाह से जो दो अजनबियों के दरमियान एक रिश्ता और तअल्लुके ख़ास पैदा हुआ था , उसी रिश्ते और तअल्लुक को तोड़ देने का नाम तलाक है । तलाक़ शरीअत में अगरचे एक मुबाह चीज़ है लेकिन उसका इस्तेमाल ख़ास दुश्वारियों और परेशानियों के वक़्त करना चाहिए । ऐसा नहीं कि मियाँ - बीवी में हल्की फुल्की कोई बात हुई या औरत में कुछ कमी देखी और फ़ोरन तलाक दे बैठे । बल्कि आपस में पहले मेल - मिलाप और सुलह का रास्ता इख्तियार करना चाहिए । कुर्आने मुक़द्दस में रब्बे कायनात इरशाद फ़रमाता है :*_

_*" फिर अगर वे तुम्हें पसंद न आयें तो करीब है कि कोई चीज़ तुम्हें नापसंद हो और अल्लाह उसी में बहुत भलाई रखे। "*_ 

_*( सुरह अलनिसा )*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 74*_           

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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