शादी की रस्में 64
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 064*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨शादी की रस्में✨*_
_*💕दूल्हा-दुल्हन को उबटन या हल्दी वगैरह मलना जाइज़ है। दूल्हा की उम्र अगर नो दस साल की हो तो अजनबी औरत भी उसके बदन में उबटन हल्दी वगैरह लगा सकती है। हाँ, अगर दूल्हा बालिग हो तो ना महरम औरत का उसके बदन पर हाथ लगाना नाजाइज़ है। शादी ब्याह के मौके पर अकसर जवान औरतें बालिग दूल्हा के बदन पर उबटन वगैरह मलती हैं, यह नाजाइज़ और सख्त हराम है। मुसलमानों को इससे एहतिराज़(बचना) लाज़िम है।*_
_*💫रस्मों की पाबन्दी करना उसी हद तक जाइज़ है कि किसी हराम काम का इरतिकाब न करना पड़े। कुछ लोग रस्मों की पाबन्दी इस तरह करते हैं कि हरामो नाजाइज़ काम तक कर बैठते हैं। अकसर जाहिलों में यह रिवाज है कि मोहल्ले या रिश्ते की औरतें जमा होती हैं और गाती ही हैं यह हराम है। अव्वलन ढोल बजाना हराम, फिर औरतों का गाना मजीद बरआं, औरतों की आवाज़ नामहरमों तक पहुंचाना यह अलैहदा हराम है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 72/73*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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