लड़कियों का पैदा होना बाइसे रह़मत है 54

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 054*

                 *बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*

    _*🧕लड़कियों का पैदा होना बाइसे रह़मत है 🧕*_

_*पुराने ज़माने में लड़कियों का पैदा होना बाइसे नंग व आर समझा जाता था, समाज व मुआशिरे में बुरा तसव्वुर किया जाता था। अरब के लोग अपनी जिहालत व दरिंदगी का मुज़ाहिरा करते हुए कभी इसे भेंट चढ़ाते और कभी ज़िन्दा क़ब्र मे दफ़न कर देते थे। सदियों से यही पुरानी रस्म चली आ रही थी लेकिन मोहसिने इंसानियत के दुनिया में तशरीफ़ लाते ही इन बुरी रस्मों का खात्मा हो गया और आपने उन दरिन्दा सिफ़त इंसानों को इस्लाम के सांचे में ढाल दिया। ज़िन्दगी का सलीका सिखाया और सही मानों में इस्लाम का शैदाई बना दिया और आपने बबांगे दुहल दुनिया वालों को पैगाम सुना दिया कि लड़कियों का पैदा होना बाइसे ज़हमत नहीं बल्कि बाइसे रह़मत है। उनकी पैदाईश वबाले जान नहीं बल्कि जहन्नम से बचाने के लिए एक वसीला है। इनकी परवरिश अल्लाह व रसूल की खुशनूदी और जन्नत में जाने का एक ज़रिया है।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 67*_                   

_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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