औलाद के कातिल 50
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 050*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*🗡️औलाद के कातिल 🗡️*_
_*किस क़दर ज़ालिम हैं वह मर्द व औरत जो एक नन्ही सी जान को दुनिया में आँखें खोलने से पहले ही मौत की नींद सुला देते हैं। क्या ये ज़मान-ए-जाहिलियत के जाहिलों की पैरवी नहीं? क्या ये साफ़ खुला हुआ क़त्ल नहीं? ऐसी औरतें यक़ीनन माँ के रिश्ते पर एक बदनुमा दाग़ हैं, समाज के लिए एक नासूर हैं जो अपने शिकम(पेट) में परवान चढ़ रही औलाद को सिर्फ इसलिए सज़ा देती हैं कि वह एक लड़की है। क्या ये औरतें यह सोचने के लिए तैयार नहीं कि वे भी तो पहले अपनी माओं के पेट में थीं। अगर इनकी माएं इन्हें न जनतीं और पेट में ही खत्म कर देतीं तो क्या आज वे दुनिया में मौजूद होती?*_
_*📓कुर्आन में अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:*_
_*📝"तहक़ीक कि तबाह हुए वे जो अपनी औलाद को क़त्ल करते हैं अहमक़ाना जिहालत से।"*_
_*(सूरह इनआम)*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 65*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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