बच्चे की पैदाइश 48
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 048*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨बच्चे की पैदाइश ✨*_
_*💫बच्चा कभी बाप के मुशाबह, कभी माँ के मुशाबह होता है। इसकी वजह यह है कि औरत के रहम में दो खाने होते हैं। दायां खाना लड़के के लिए और बायां खाना लड़की के वास्ते और अगर मर्द का नुत्फा ग़ालिब आये तो लड़का बनता है और औरत का ग़ालिब पड़ा। लड़की बनती है। फिर अगर मर्द का नुत्फा गालिब आया और रहम के सीधे खाने में पड़ा तो लड़का पैदा होगा ज़ाहिरो बातिन मर्द और अगर औरत का नुत्फ़ा ग़ालिब आया और रहम के बायें ख़ाने में पड़ा तो लड़की होगी ज़ाहिरो बातिन औरत और अगर मर्द का नुत्फ़ा ग़ालिब आया और रहम के बायें खाने में गिरा तो सूरतन तो लड़का होगा मगर दिल के ऐतिबार से ज़नाना होगा। उसे दाढ़ी मुंडाने, जेवर पहनने, हाथ पांव में मेंहदी लगाने, औरतों जैसे बाल रखने, जूड़ा बांधने वगैरह जनानी वज़ा का शोक होगा और अगर इस हालत में मर्द का नुत्फा खफ़ीफ़ गालिब हो तो वह बच्चा ज़नाना, ज़नखा बन जायगा और अगर औरत का नुत्फ़ा ग़ालिब आया और रहम के दाहिने खाने में गिरा तो होगी तो सूरतन लड़की मगर दिल के ऐतिबार से मर्दानी। उसे घोड़े पर चढ़ने, तलवार चलाने, साईकिल और मोटर साईकिल चलाने, मर्दाना जूता पहनने वगैरह मर्दानी वज़ा का शौक होगा।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 64*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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