बच्चे की पैदाइश 47
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 047*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨बच्चे की पैदाइश ✨*_
_*कुर्आन ए करीम में - अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है:*_
_*"और बेशक हमने आदमी को चुनी हुई मिट्टी से बानाया, फिर उसे पानी की बूंद किया एक मजबूत ठहराव में, फिर हमने उस पानी की बूंद को खून की फुटक किया, फिर खून की फुटक को गोश्त की बोटी, फिर गोश्त की बोटी को हड्डियां, फिर उन हड्डियों पर गोश्त पहनाया, फिर उसे और सूरत में उठान दी, तो बड़ी वरकत वाला है अल्लाह, सबसे बेहतर बनाने वाला।"*_
_*🕋खालिके कायनात ने पैदा करने का तरीका यह रखा है कि पहले नुत्फ़े की शक्ल में माँ के रहम में रखा, फिर उस नुत्फे को बस्ता खून - किया, फिर उस बस्ता खून को गोश्त का लोथड़ा किया, फिर उस - लोथड़े में हड्डियाँ बनाई, फिर उन हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया, फिर उसे एक अच्छी सूरत में पैदा किया।*_
_*✨इसको इस तरह समझिये कि इस्तिक़रारे मनी के बाद नुतफ़ा एक सिफ़त से दूसरी सिफ़त की जानिब रफ़्ता रफ़्ता मुनतकिल होता है। यानी नुतफ़ा ठहरने के बाद खून के अज्ज़ा नुतफ़े से मखलूत होने लगते हैं। यहाँ तक कि अरबईने ऊला के बिल्कुल आखिरी दिनों में नुतफा बस्ता खून हो जाता है, फिर रफ़्ता-रफ़्ता बस्ता खून से गोश्त के अज्जा मखलूत होने लगते हैं। यहाँ तक कि अरबईने सानिया के बिल्कुल अख़ीर में वह गोश्त का लोथड़ा हो जाता है, फिर तीसरे चालीस में तस्वीरे इंसानी की तकमील अमल में आती है। इसके बाद रूह डाली जाती है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 63*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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