अय्यामे हम्ल 46
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 046*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨अय्यामे हम्ल ✨*_
_*💫साहिबे गुनिय्या लिखते हैं: "जो हामिला औरत हम्ल की तक्लीफ़ बरदाश्त करती है तो, उसके लिये कायमुल्लैल और साइमुन्नहार (यानी पूरी रात इबादत करने और पूरे दिन रोज़ा रखने) का सवाब मिलता है। और अल्लाह की राह में जिहाद करने का अज्र मिलता है और जब उसे दर्दज़ह लाहिक होता है तो हर दर्द के बदले उसको एक गुलाम आज़ाद करने का सवाब मिलता है"।*_
_*✨औरत को अय्यामे हम्ल में काफी तक्लीफ़ होती है। औरत को चाहिये कि इस तक्लीफ़ को हंसी खुशी बरदाश्त करे, ज़बान पर कोई शिकवा शिकायत न लाए। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऐसी औरत के लिये पैशगोई फ़रमाई है कि औरत ज़मानए हम्ल से लेकर दूध छुड़ाने तक उस ग़ाज़ी की तरह है जो सरहदों की निगरानी करता है और अगर औरत दर्दज़ह की तकलीफ़ में इन्तिकाल कर जाए तो उसको शहादत का सवाब मिलता है।*_
_*हामिला औरत को चाहिये कि हम्ल के ज़माने में खुशो खुर्रम रहे, रंजो ग़म करीब में भी भटकने न दे। अक्सर गुस्ल करे, साफ़ सुथरे कपड़े पहने, गिज़ा हल्की मुअतदिल और मुकव्वी खाये, ज़्यादा सर्द या ज़्यादा गर्म चीज़ों से परहेज़ करे, खूबसूरत तस्वीरें देखे और अपने खूबसूरत रिश्तेदारों के पास बैठे, बे वक़्त सोने और जागने से परहेज़ करे, सक़ील और गर्म ग़िज़ा न खाये, सख्त बिस्तर पर न सोये, फल खुसूसन सन्तरे का इस्तिमाल ज़्यादा करे। सन्तरे का खाना औलाद के खूबसूरत होने की दलील है। दिलो दिमाग को गंदे और बुरे ख्यालात से पाको साफ़ रखे, इसलिये कि इसका असर कुद्रती तौर से बच्चे पर पड़ता है।*_
_*📖मसअलाः- औरत से अय्यामे हम्ल में भी हमबिस्तरी करना जाइज़ है मगर अतिब्बा(हकीमों) के नज़दीक जिमाअ़् न करना बेहतर है।*_
_*✨साहिबे गुनिय्या फरमाते हैं:*_
_*"हम्ल ज़ाहिर होने पर मर्द को लाज़िम है कि औरत की ग़िज़ा हराम बल्कि हराम के शुबह से भी पाक रखे ताकि बच्चे की नश्वो नुमा इस पर हो कि शैतान की वहाँ तक रसाई न हो सके। ज़्यादा बेहतर यह है कि हलाल गिजा की पाबन्दी पहले दिन ही से की जाय।"*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 61/62*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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