राज़ की बातों का बयान करना 42
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 042*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*✨राज़ की बातों का बयान करना ✨*_
_*📚हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "क़यामत के दिन सबसे ज़्यादा बदबख्त वह मर्द होगा जो अपनी बीवी की खास बातें लोगों में ज़ाहिर करे। इसी तरह वह औरत जो अपने शौहर की ख़ास बातें अपनी सहेलियों को सुनाए। यह अज़ीम गुनाह है।"*_
_*📚हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जिस किसी ने सोहबत की बातें लोगों में बयान कीं, उसकी मिसाल ऐसी है जैसे शैतान औरत ने शैतान मर्द से आम चौराहे पर मुलाकात की और खुले आम लोगों के सामने ही सोहबत करने लगे।"*_
_*मियाँ-बीवी में से हर एक शबे ज़िफ़ाफ़ की बातें (यानी मर्द अपने दोस्त अहबाब को सुनाया करता है और बीवी अपनी सहेलियों को सुनाया करती है) यह कत्अन नाजाइज़ और जाहिलाना तरीका है। -सरासर बेशर्मी और बेहयाई है। साहिबे गुनिय्या फ़रमाते हैं:*_
_*💫"अपनी बीवी से जिमाअ़् करने की हालतो कैफ़ियत का तज़्किरा करना न मर्द के लिये जाइज़ है, न ही औरत के लिये कि वह किसी दूसरी औरत से उसका तज़्किरा करे। यह रज़ालत और छिछोरापन है, अक़्लन और शर्अन दोनों एतिबार से कबीह और बुरा है।"*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 57*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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