हालते हैज़ में मुबाशरत के नुकसानात 39
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 039*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*हालते हैज़ में मुबाशरत के नुकसानात*_
_*कुर्आन ए करीम में - अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है:
"और तुम से पूछते हैं हैज़ का हुक्म, तुम फ़रमाओ वह । नापाकी है।"*_
_*हालते हैज़ में जो खून निकला करता है वह एक गंदा और जरासीम से आलूदा खून हुआ करता है। उसके अन्दर ज़हरीला माद्दा भी होता है। यह खून औरत के जिस्म में ज़ाइद और बेकार हुआ करता है। अगर यह खून औरत के जिस्म में रह जाय तो औरत मुख्तलिफ़ बीमारियों में मुब्तिला हो जाती है। इस हालत में हमबिस्तरी करना मर्दो औरत दोनों के लिये नुकसानदह है। खास तौर से औरत की सेहत के लिये ज़्यादा मुज़िर है। क्योंकि औरत की फ़र्ज (शर्मगाह) से लगातार गंदा खून जारी होता रहता है, जिसकी वजह से वह मकाम इन्तिहाई नरमो नाजुक हो जाता है। अब अगर ऐसी हालत में जिमाअ़् किया जाए तो उस मकाम में रगड़ की वजह से ज़ख़्म, सोज़िशे रहम वगैरह अमराज़ लाहिक होने का अन्देशा रहता है। मर्द में सुज़ाक, आतिशक, एड्स वगैरह होने का इमकान ज़्यादा हो जाता है।*_
_*🏥अतिब्बा ने लिखा है कि हालते माहवारी में हमबिस्तरी करने से आतिशक वगैरह पैदा हो जाने का अन्देशा है और अगर इस सोहबत से हम्ल ठहर जाय तो मुमकिन है कि बच्चा कोढ़ी पैदा हो। हदीस में है कि हैज़ की औलाद को जुज़ाम हो जाता है।*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 54/55*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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