हालते हैज़ में मुबाशरत हराम है। 38
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 038*
*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*
*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*
_*हालते हैज़ में मुबाशरत हराम है।*_
_*बहुत से मर्द शादी की पहली रात में बेसब्री का मुज़ाहिरा करते हैं और इसके बावुजूद कि औरत हायज़ा है, सोहवत कर बैठते हैं। यह सख्त नाजाइज़ है बल्कि औरत पर वाजिब है कि अगर वह हायज़ा हो तो अपनी हालत से शौहर को वाकिफ करादे ताकि शौहर मुबाशरत न करे, वरना औरत सख्त गुनाहगार होगी। हुजूर सल्लल्लाह और वसल्लम ने ऐसे आदमी से सख्त बेज़ारी का इज़्हार फ़रमाया हायज़ा औरत से वती (संगत) करता है।*_
_*📚हदीसः- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः "जिस शख्स ने हायज़ा औरत से वती की या अपनी औरत से उस के पीछे के मक़ाम में वती की या काहिन के पास गया. उसने उसका इन्कार किया जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल हुआ।"*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 53/54*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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