कसरतें जिमअ् के नुक़सानात 36

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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_



                             *✍️ पोस्ट न. 036*                

            _*💔कसरतें जिमअ् के नुक़सानात💔*_
                                *{पार्ट 4️⃣}*

_*💫इमाम गज़ाली रहमतुल्लाहि अलैह फरमाते हैं:*_

_*👉🏻 "मर्द के लिये चार दिनों में एक मर्तबा वती(संभोग) करना मुनासिब है, नीज़ औरत की ज़रूरत पूरी करने और उसकी परहेज़गारी के एतिबार से इस हद से कमो बेश(कम-ज़्यादा) भी कर सकता है क्योंकि औरत को पाक दामन रखना मर्द पर वाजिब है।"*_

_*✨कअ़्ब बिन सवार ने एक आबिदो ज़ाहिद को हुक्म दिया:*_

_*💫"तीन दिन तू शब बेदारी और इबादत में गुज़ार और चौथे दिन अपनी बीवी से तअल्लुक रख।"*_

_*👉🏻 कुछ लोग शादी के बाद शुरू-शरू में औरत पर अपनी मर्दानगी व कुव्वत का रोअब डालने के लिये दवाओं या तिला वगैरह का इस्तेमाल करते हैं जिससे मियाँ-बीवी खूब लुत्फ़ अन्दोज़ होते हैं लेकिन बाद में उन दवाओं का असर उल्टा पड़ता है। इसलिये कि अक्सर इस किस्म की दवाओं में भंग, अफीम, संखिया वगैरह ज़हरीली चीजें शामिल होती हैं, जो मर्द की कुव्वते बाह के लिये सख्त नुकसानदह है। लिहाज़ा अगर कुव्वते मर्दानगी को बरकरार रखना है तो मस्तू। (बनावटी) दवाओं के बजाय मुक़व्वी ग़िज़ाओं का इस्तिमाल कर ग़िज़ा के ज़रिये हासिल होने वाली ताक़त आरिज़ी नहीं होती बाल्की पायदार होती है।*_

_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 52*_
          
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_



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