निकाह के अहकाम 03
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_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 003*
_*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
_*💞निकाह के अहकाम 💞*_
_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः " निकाह मेरी सुन्नत है जो मेरी सुन्नत पर अमल न करे वह मेरे तरीके पर नहीं ।*_
_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " जो शख्स अल्लाह तआला के हुजूर तय्यबो ताहिर ( पाक - साफ ) जाना चाहता है तो उसे चाहिये कि आज़ाद औरतों से निकाह करे ।*_
_*💗निकाह करना सुन्नते अम्बिया अलैहिमुस्सलाम है । जितने अम्बिया ए किराम दुनिया में जलवागर हुए , सभी ने शादियाँ की , हत्ता कि हज़रत यहया अलैहिस्सलाम के बारे में भी हैं की आप ने शादी तो की लेकिन किसी वजह से जिमाअ़ ( हमबिस्तरी ) न किया । इसी तरह हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम भी जब आसमान से नजूल फ़रमायेंगे तो आप शादी करेंगे और आपकी औलाद भी होगी ।*_
_*📚(तिरमिजी शरीफ जिल्द1 , पेज 128 / रूहुलबयान जिल्द 1 पेज़ 73 )*_
_*💗निकाह और उसके हुकूक अदा करने और औलाद की तरबियत मशगूल रहना नवाफिल में मशगूल होन से बेहतर है ।*_
_*✨मर्द के लिए बअज़ सूरतों में निकाह करना फर्ज़ और बअज सूरतों में वाजिब हो जाता है । मसलन जो आदमी दैन महर और औरत का खर्चा देने पर कुदरत रखता है और उसे यकीन है कि निकाह न करने की सूरत में ज़िना वाके हो जायगा तो उस पर निकाह करना फर्ज इसी तरह जो देन महर और ख़र्चा देने की कुदरत रखता है और उसे शहवत का इतना गलबा हो कि निकाह न करने की सूरत में जिना का अन्देशा है तो उस पर निकाह करना वाजिब है । अगर ऐतिदाल " ( दरमियान ) की हालत हो तो निकाह करना सुन्नते मुअक्कदा है कि निकाह न करने पर मुसिर रहना इसाअत है । अगर आदमी हराम से बचने या इत्तिबाए सुन्नत या औलाद हासिल करने की नियत निकाह कर लेगा तो सवाब भी पायेगा । जो शख्स महज लज्जत या कज़ाये शहवत की नियत से शादी कर ले तो उसके लिये निकाह करना मुबाह है । जिस आदमी को यह यकीन हो कि निकाह कर लेगा तो नानो नफका न दे सकेगा या जो ज़रूरी हुकूक हैं उनको पुरा न कर सकेगा तो उसके लिए निकाह करना हराम है और जिनको इन बातों का अन्देशा हो तो उनके लिए निकाह करना मकरूह है । खुलासा यह है कि बअज़ सूरतों में निकाह करना सुन्नत और बअज़ सूरतों में फर्ज है । न हर सूरत में निकाह करना सुन्नत है और न हर सूरत में फर्ज़ है ।*_
_*📚( फतावा रिज्विया जिल्द 5 , पेज 581 )*_
_*📚सलिक़ा -ए- ज़िन्दगी, सफा 11/12*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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