निकाह के फवाइद 02
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴
_*🥀सलिक़ -ए- ज़िन्दगी 🥀*_
*✍️ पोस्ट न. 002*
_*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
_*💞निकाह के फवाइद 💞*_
_*✨शरीअते इस्लामिया में निकाह के जरीये मर्द व औरत के दरमियान एक दीनी व मज़हबी लगाव और एक मखसूस कल्बी तअल्लुक पैदा होता है । उनके दरमियान उलफ़त व यगांगत और उखुव्वतो मुहब्बत का माहौल पैदा होता है । दो अजनबी अफराद के दरमियान से अजनबीयत ख़त्म होकर उखुव्वतो मुहब्बत का एक पाकीज़ा रिश्ता पैदा होता है और यह रिश्ता महज़ नफ़सानी और जिन्सी ख्वाहिशात की तकमील का ज़रिया नहीं होता बल्कि इससे मकसूदे असली यह है कि मर्दो औरत के हम - रिश्ता होने से एक कामिल और खुशगवार ज़िन्दगी वजूद में आये और नस्ले इन्सानी का सिलसिला आगे बढ़े । इसलिए रब्बे कायनात ने नौए इन्सान ही से उस का जोड़ा बनाया ताकि दोनों में उलफ़तो मुहब्बत कायम रहे और तख्खलीके इन्सानी का सिलसिला दस्तूर के मुताबिक जारी रहे और नस्ले इन्सानी फलती फूलती रहे । और इन्सान दरिन्दों की तरह ज़िन्दगी न गुज़ार कर फ़रिश्ता सिफत बन जाये और अपने हम - जिन्स से मिलकर तस्कीने कल्ब हासिल करे । निकाह मर्द के लिए सुकूने कल्ब और गुनाहों से बचने का अज़ीम ज़रिया है ।निकाह से इन्सान हज़ारों गुनाहों से बच जाता है । बिलखुसूस ज़िना से महफूज़ रहता है । इसी वजह से निकाह को निस्फे ईमान भी कहा गया है ।*_
_*📓कुर्आन में : - अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है : " और उसकी निशानियों से है कि तुम्हारे लिए तुम्हारी ही जिन्स से जोड़े बनाये कि उनसे आराम पाओ और तुम्हारे आपस में मुहब्बत और रहमत रखी ।*_
_( सूरह रुम )_
_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमायाः " ऐजवानो ! तुम में से जोकोई निकाह की इस्तिताअत रखता है वह ज़रूर निकाह करे कि यह अजनबी औरत की तरफ़ नज़र करने से निगाह को रोकने वाला है और शर्मगाह की हिफाज़त करने वाला है और जिसमें निकाह की ताक़त न हो वह रोज़ा रखे क्योंकि यह शहवतको कम करता है ।*_
_*📚हदीस :- रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः बन्दे ने जब निकाह कर लिया तो आधा दीन मुकम्मल कर लिया , अब बाकी आधे के लिए अल्लाह से डरे ।*_
_*📚हदीस : - हज़रत जाबिर से मरवी है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमायाः " औरत आती है शैतान की सूरत में और जाती भी है शैतान की सूरत में , जब तुमको कोई औरत अच्छी लगे और उसका ख्याल दिल में बैठ जाये तो चाहिए कि फ़ौरन अपनी बीवी के पास जाये और उससे मुहब्बत करे क्योंकि यह मुहब्बत उसकी ख्वाहिशे नफ़्सानी को दूर कर देगी ।*_
_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः " जब किसी को कोई औरत अच्छी मालूम हो तो चाहिये कि अपने घर जाये और अपनी बीवी के साथ कुरबत करे क्योंकि इस बात में सब औरतें बराबर है ।*_
_*📚हदीस : - रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमायाः " मर्दो औरत के दरमियान जो निकाह के ज़रिये मुहब्बत पैदा होती है , ऐसी कोई मुहब्बत देखने में नहीं आती यानी जो बाहमी मुहब्बत व उलफत निकाह से पैदा होती है उसकी कोई नज़ीर नहीं मिलती ।*_
_*📍नोट : - हज़रत इमाम गज़ाली रहमतुल्लाहि अलैहि ने निकाह के बारे में बहुत से फवाइद तहरीर किये हैं , उनमें से बअज़लिखे जाते हैं :*_
_*✨औलाद का हासिल होना , नेक औलाद इन्सान के लिए सदकए जारिया है ।*_
_*✨आदमी अपने दीन की हिफाज़त करता है और शहवते नफ़्सानी जो शैतान का हथियार है , अपने से दूर करता है ।*_
_*💫इसलिए हुजूर सरवरे कायनात सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया " जिसने निकाह किया उसने अपने निस्फ दीन की हिफाज़त कर ली और जो शख्स निकाह नहीं करता गो फ़र्ज ( शर्मगाह ) को बचा ले लेकिन आँख को बद निगाही और दिल को वसवसे से नहीं बचा सकता ।*_
_*💓निकाह की वजह से औरतों से उन्सियतो मुहब्बत होती है , उनके साथ मज़ाहो दिल लगी करने से दिल को राहत होती है और इस आसाईश के ज़रिये शोके इबादत ताज़ा होता है क्योंकि हमेशा इबादत में रहना उदासी लाता है ।*_
_*💗औरत घर की गम ख्वारी करती है , खाना पकाने , बर्तन धोने , झाडू देने की खिदमत अन्जाम देती है । अगर मर्द ऐसे कामों में मशगूल होगा तो इल्मो अमल और इबादत से महरूम रहेगा । इसलिए दीन की राह में औरत अपने शौहर की यारो मददगार होती है ।*_
_*📚( कीमिया - ए - सआदत पेज 255 )*_
_*📚सलिक़ -ए- ज़िन्दगी, सफा 8/9/10/11*_
_*🧮 जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/BlTnmJKrHakLQ0Y3Q9Q1KC
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें